विधानसभा चुनावों के दौरान भितरघात की शिकायतों पर भाजपा मौन है, जबकि कांग्रेस में धड़ल्ले से कार्रवाई हो रही है। भाजपा के कई प्रत्याशियों ने प्रदेश नेतृत्व से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल कार्यकर्ताओं को बाहर निकालने की मांग उठाई, लेकिन उन्हें शांत रहने को कहा जा रहा है।
प्रदेश नेतृत्व का दावा है कि अनुशासन समिति ऐसे मामलों को सुनेगी, लेकिन अभी तक समिति की बैठक तक नहीं हुई। यही नहीं मंडल स्तर पर कार्रवाई पर भी विराम लगा दिया है। भितरघातियों के खिलाफ पार्टी की इस रणनीति से कई प्रत्याशी संशय में हैं।
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों की माने तो विधानसभा स्तर पर कार्रवाई हुई तो कई बड़े चेहरों तक भी उसकी आंच पहुंच सकती है। ऐसे में चुनाव परिणाम से पहले पार्टी किसी नए विवाद से बचती दिख रही है।
भाजपा में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की परंपरा रही है, लेकिन इस बार इसमें बदलाव दिख रहा है।
मतदान से पहले पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय उतरे बागियों पर भी आखिरी समय में कार्रवाई की गई। मतदान के बाद कई सीटों पर प्रत्याशियों ने भितरघात की शिकायत की।