मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर के टिकट पर पेच फंस गया है। स्टोक्स के चुनाव लड़ने पर असमंजस की स्थिति है।
बड़े नेताओं के बेटी-बेटों को टिकट देने और कुछ हलकों में बगावत की आशंका में उलझी कांग्रेस शनिवार को शेष नौ सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं कर सकी। हालांकि, जिनके टिकट लगभग फाइनल हो गए हैं, उन्हें नामांकन भरने के लिए हरी झंडी दे दी है।
देर शाम उनके घरों में टिकट मिलने की खुशी में पटाखे फोड़े गए। नामांकन को महज सोमवार का एक दिन शेष रहने के कारण टिकट के दावेदारों की धुकधुकी बढ़ गई है। इसी बीच, शनिवार को विक्रमादित्य दिल्ली पहुंच गए। टिकट फाइनल न होने के बावजूद कौल सिंह की बेटी चंपा ने मंडी सदर से पर्चा दाखिल कर दिया।
दो बार हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक
चंपा का दावा है कि उन्हें सीएम और पार्टी हाईकमान की हरी झंडी मिल गई है। शनिवार को भी कांग्रेस शिमला ग्रामीण, ठियोग, मंडी सदर, पालमपुर, शाहपुर, कुल्लू, मनाली, नालागढ़ व कुटलैहड़ सीटों के लिए प्रत्याशियों पर फैसला नहीं कर सकी।
शनिवार को दो बार केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई, मगर कुछ टिकटों पर फैसला नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो शाहपुर, कुल्लू और मनाली सीटों पर टिकट तय हो चुके हैं।
कुटलैहड़ से रामनाथ के बेटे विवेक शर्मा और पालमपुर सीट से बीबीएल बुटेल के पुत्र आशीष बुटेल का नाम लगभग तय हैं। नालागढ़ से लखविंदर राणा को दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने पर सहमति नहीं बन पाई। असल पेच वीरभद्र सिंह के बेटे और कौल सिंह ठाकुर की बेटी पर फंसा हुआ है।
विरोधी गुट के नेता बना रहे दबाव
कांग्रेस आलाकमान पर विरोधी गुट के नेता दबाव बना रहे हैं कि अगर एक ही परिवार से दो लोगों को टिकट दिया गया तो इसका गलत संदेश जाएगा। भाजपा को चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ वंशवाद का नया मुद्दा मिल जाएगा।
जहां तक ठियोग सीट की बात है तो इस पर विद्या स्टोक्स पहले वीरभद्र को चुनाव लड़वाना चाह रही थी। स्टोक्स को वीरभद्र सिंह ने इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए मनवा भी लिया था, मगर उनकी सीट पर भी स्थिति साफ नहीं है।