फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हॉट सीट लाइव सुजानपुरः दिलचस्प मोड़ पर गुरु-शिष्य का चुनावी दंगल

Tue, 07 Nov 2017 12:07 PM IST
बविंद्र वशिष्ठ/अमर उजाला, सुजानपुर (हमीरपुर)
विज्ञापन
विज्ञापन
हमीरपुर के सुजानपुर हलके पर इस बार पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं। भाजपा ने सीएम प्रत्याशी धूमल को हमीरपुर के बजाय इस बार सुजानपुर से उतारा है। यहां उनके सामने कांग्रेस के राजेंद्र राणा हैं, जो कभी उनके खासमखास हुआ करते थे। 
विज्ञापन



राणा ने 2012 में बतौर निर्दलीय चुनाव लड़कर कांग्रेस की अनीता वर्मा को 14166 वोटों से हराया था। भाजपा की उर्मिल ठाकुर तीसरे स्थान पर रही थीं। इस बार यहां से कुल पांच प्रत्याशी मैदान में हैं। 

यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में है। दोनों दलों ने यहां प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। प्रदेश की सबसे ज्यादा हॉट मानी जा रही सुजानपुर सीट की लाइव रिपोर्ट। 
विज्ञापन


राजा संसार चंद की नगरी सुजानपुर में इस बार नजारा बदला-बदला सा है। पौ फटने के बाद भी ब्यास किनारे बसी ये नगरी हल्के कुहासे में लिपटी है। यहां के ऐतिहासिक चौगान में कुछ लोग सुबह की चहलकदमी कर रहे हैं।

चाय की दुकान पर चुनावी चर्चा

अखबार को हाथ में लिए तीन-चार लोग सामने चाय की दुकान पर चुनावी चर्चा में मशगूल हैं। एक उम्रदराज व्यक्ति कह रहे हैं - इस बार तो सुजानपुर में लोगों को भी सियासी दलों ने धर्म संकट में डाल दिया है। 

एक ओर मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी है तो दूसरी ओर सुजानपुर के लोगों के साथ उठने-बैठने वाला व्यक्ति। अब किसे पकड़ें और किसे छोड़ें। यह बात हो रही है सूबे की सबसे हॉट सीट सुजानपुर की। 

यहां से भाजपा ने सीएम प्रत्याशी घोषित कर दिग्गज नेता प्रेम कुमार धूमल को उतारा है तो कांग्रेस से कभी उन्हीं के राजनीतिक शिष्य रहे राजेंद्र राणा ताल ठोक रहे हैं।

सुजानपुर से हमीरपुर की ओर करीब 12 किलोमीटर दूर चबूतरा में कुछ लोग सड़क किनारे खड़े हैं। सामने एक घर पर भाजपा और कांग्रेस दोनों के झंडे लहरा रहे हैं। चर्चा के बीच एक अधेड़ व्यक्ति कहता है - काम धूमल साहब ने भी किए हैं और राणा ने भी। 

दोनों संपर्क में हैं। ऐसे में उन्होंने दोनों का झंडा लगा रखा है। वोट किसे देना है, वो उस समय पर तय करेंगे। इससे तीन किलोमीटर आगे कुठेड़ा में एक दुकान के बाहर चार-पांच युवक खड़े हैं। कह रहे हैं सुजानपुर क्षेत्र का विकास होना चाहिए।

सुजानपुर से सीएम बनता है तो

अगर सुजानपुर से सीएम बनता है तो भी गौरव की बात है। इसी बीच, यहां से बाइकों पर कांग्रेस के झंडों के साथ युवाओं की एक टोली राणा के पक्ष में नारेबाजी करते हुए गुजरती है।

कुठेड़ा से चलोखर, री, पटलांदर होते हुए सुजानपुर जाने वाली सड़क पर भी कई जगह एक ही घर पर भाजपा और कांग्रेस दोनों के झंडे और पोस्टर दिख रहे हैं। सुजानपुर बाजार झंडे और बैनरों से अटा पड़ा है। 

हलके के ग्रामीण क्षेत्र की इस सड़क पर कोई राणा की वकालत कर रहा है तो कोई धूमल की। इस इलाके में गांव-गांव प्रचार करती समर्थकों की टोलियां मिल रही हैं। कांग्रेस प्रत्याशी राणा के गृह क्षेत्र पटलांदर में एक पेड़ के नीचे कुछ महिलाएं बैठी हैं।

देहात के कामकाज के बीच इनकी भी चुनावों पर गपशप चल रही है। इनमें से एक पंचायत प्रतिनिधि रह चुकी महिला कह रही हैं - इस बार यहां नेता भी अपने वोटरों की पहचान नहीं कर पा रहे हैं। सुबह जो लोग राणा की जनसभा में दिखते हैं वो शाम को धूमल समर्थकों के साथ भी होते हैं। यह समय ही बताएगा कि जीत किसकी होती है।
विज्ञापन

सुजानपुर से सरकार बनाम काम और नाम का नारा

हलके में इस बार दो नारे चल रहे हैं। भाजपा - अबकी बार सुजानपुर से सरकार का नारा देकर सीएम फैक्टर को भुनाने का प्रयास कर रही है। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में काम और नाम के बीच मुकाबले का नारा दिया जा रहा है। इसके अलावा धूमल के समर्थक उनके पूर्व में किए कार्यों का हवाला देकर भविष्य के सपने दिखा रहे हैं। दूसरी ओर, राणा समर्थक धरती पुत्र के नारे को भी बुलंद कर रहे हैं।

समर्थकों में जोश, मतदाता खामोश
सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में धूमल और राणा दोनों के समर्थकों में जोश दिख रहा है। दोनों के सपोर्टर खुलकर सामने आ रहे हैं, लेकिन आम मतदाता खामोश हैं। धूमल के मुख्यमंत्री प्रत्याशी होने के बावजूद राणा के समर्थक वैसे ही मैदान में हैं, जैसे 2012 में थे। नया क्षेत्र होने के बावजूद धूमल के समर्थकों की भी यहां कमी नहीं है। इस सियासी दंगल को यहां के आम मतदाता बड़ी खामोशी से देख रहे हैं।

दोनों के बेटे संभाल रहे कमान
मुख्यमंत्री प्रत्याशी होने के कारण धूमल प्रदेश के अन्य हलकों में भी प्रचार कर रहे हैं। ऐसे में सुजानपुर में चुनाव की बागडोर उनके छोटे बेटे अरुण धूमल संभाल रहे हैं। दिन भर प्रचार के अलावा वह टीमों के साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं। देर रात तक वह टीम के साथ बैठकें कर अगले दिन की रणनीति तय करते हैं। दूसरी ओर, राजेंद्र राणा के बेटे अभिषेक राणा ने भी पिता के चुनाव की पूरी कमान संभाल रखी है।
--
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें