इस बार पालमपुर सीट कई मायनों में हॉट है, जिसका अहसास बाजार में पहुंचते ही होने लगता है। शनिवार सुबह दस बजे पालमपुर बाजार में खासी चहलकदमी है। बाजार में दोनों ओर दुकानों पर भाजपा और कांग्रेस की पताकाएं लहरा रही हैं।
दुकानों में ग्राहक नहीं हैं, लेकिन गुनगुनी धूप में खड़े दुकानदारों ने सियासी बाजार सजा रखा है। कोई मोदी रैली पर बात कर रहा है तो किसी को बुटेल की विरासत आगे बढ़ने की चिंता है।
झंडों और होर्डिंग की लड़ाई बाजार के बीच पहुंचने पर और कड़ी हो जाती है। शहर के बीचोंबीच कांग्रेस के झंडे और घने होने लगते हैं। तभी एक जीप लाउडस्पीकर के साथ वहां से गुजरती है। इस पर ऑटो चुनाव चिन्ह का झंडा लहरा रहा है।
टैक्सी स्टैंड पर एक ड्राइवर बोला - लो जी भाजपा पार्ट टू आ गई। उसने पूछने पर बताया कि ये प्रवीण शर्मा हैं। उसने आगे कुछ नहीं कहा, पर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई कि पालमपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की टक्कर भाजपा से है तो भाजपा की भाजपा पार्ट टू से भी है।
यहां भाजपा और कांग्रेस के चेहरे नए हैं, लेकिन उनके पीछे की सियासत खूब गहरी है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के गृह क्षेत्र में उनकी अनदेखी कर भाजपा ने दिल्ली की पसंद इंदु गोस्वामी को उतार दिया। यहां इस बात की बड़ी चर्चा है कि इंदु को टिकट कैसे मिला।
इंदु के मुकाबले में कांग्रेस ने यहां आशीष बुटेल को उतारा है। आशीष विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल के बेटे हैं। बुटेल राजनीति से रिटायर होना चाहते हैं तो कांग्रेस ने फेयरवेल गिफ्ट के तौर पर बेटे को टिकट दिया।
पालमपुर से सियासी अखाड़े में तीसरा कोण शांता के करीबी और पूर्व विधायक प्रवीण शर्मा का है। वे इंदु के बाजी मार ले जाने के बाद निर्दलीय उतरे हैं। शांता के मना करने के बाद भी मैदान में हैं। इस सीट की धुरी बुटेल परिवार और शांता खेमे के इर्द-गिर्द घूमती है।