राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और उत्तरी क्षेत्र परिषद की बैठक में मामला उठाया जाएगा। प्रदेश की भूमि पर किसी को भी कब्जा नहीं करने देंगे। चंबा, परवाणू और लाहौल-स्पीति में पड़ोसी राज्यों ने हिमाचल की भूमि कब्जाई है।
हिमाचल प्रदेश की भूमि पर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हरियाणा सरकार ने कब्जे किए हैं। सोमवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह मामला उठा। राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और उत्तरी क्षेत्र परिषद की बैठक में मामला उठाया जाएगा। प्रदेश की भूमि पर किसी को भी कब्जा नहीं करने देंगे। चंबा, परवाणू और लाहौल-स्पीति में पड़ोसी राज्यों ने हिमाचल की भूमि कब्जाई है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने चंबा के सलूणी में प्रदेश की भूमि पर साढ़े नौ किमी सड़क और पर्यटन गतिविधियों के लिए ढांचे भी बनाए हैं।
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प्रश्नकाल के दौरान डलहौजी से कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने यह मामला उठाया।
कहा कि सलूणी के कुंडी मोराल सीमा पर जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्रदेश की भूमि पर कब्जा किया है। इस क्षेत्र में अगर कोई निजी भूमि पर निर्माण कर रहा है तो उसे भी जम्मू-कश्मीर सरकार तोड़ रही है। राजस्व मंत्री ने बताया कि इन कब्जों को हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के साथ सलूणी में 10 दिसंबर, 2021 में संयुक्त निशानदेही हुई है। वे अपना कब्जा बता रहे थे, लेकिन उनके पास ततीमा, शजरा आदि कुछ नहीं था। हिमाचल के पास ये सारी चीजें हैं।
सलूणी में उन्होंने साढ़े नौ किलोमीटर सड़क बनाई है। आधारभूत ढांचा भी खड़ा किया है। लाहौल के सरचू क्षेत्र में लद्दाख की ओर से कब्जे हुए हैं। परवाणू के साथ भी हरियाणा के साथ जमीनी विवाद है। विधायक आशा कुमारी ने कहा कि जो बुर्जियां पुरानी लगी थीं, उन्हें तो हटा लेना चाहिए। खाली जमीन पर हक जताना चाहिए। इस पर मंत्री बोले, राजस्व रिकॉर्ड हमारे पास है। उसके मुताबिक हिमाचल सरकार ऐसा भी नहीं करना चाहती है कि बीच में कोई झगड़ा हो। उनको कहा जाएगा कि जहां कब्जा है, उसे हटाया जाए।