वहीं, हिमाचल प्रदेश में कार्यरत आशा वर्करों के नियमितीकरण के लिए भी सरकार भविष्य में कोई नीति नहीं बनाएगी। नालागढ़ के विधायक हरदीप सिंह बावा के सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आशा वर्करों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के रिक्त पदों पर मर्ज या समायोजित करने का भी कोई विचार नहीं है। मंत्री ने बताया कि आशा वर्कर प्रोत्साहन राशि आधारित कार्यकर्ता हैं। वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों के तहत केंद्र सरकार के मानदंडों और एनएचएम के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करती हैं। उन्हें प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि के साथ राज्य सरकार की ओर से मानदेय दिया जाता है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था में आशा वर्करों के लिए स्थायी नीति का कोई प्रावधान नहीं है। स्वास्थ्य विभाग में उनकी योग्यता के अनुरूप ऐसा कोई अलग कैडर भी मौजूद नहीं है, जिसके तहत उन्हें विभाग के रिक्त पदों पर समायोजित या मर्ज किया जा सके।