जिला कुल्लू में मौसम की मार सेब की फसल पर भारी पड़ गई है। घाटी में इस साल सेब दस सालों में सबसे कम उत्पादन होगा। बागवानी विभाग की फील्ड रिपोर्ट के अनुसार इस साल कुल्लू जिला में मात्र 39 लाख करीब 79932 मीट्रिक टन उत्पादन होने का अनुमान लगाया है।
गत साल घाटी से 45 लाख से अधिक सेब पेटियां देश की विभिन्न मंडियों के लिए भेजी गई थीं, लेकिन इस साल बागवानों की मेहनत पर मौसम भारी पड़ गया है और 61 फीसदी सेब को तबाह कर दिया है। सबसे अधिक नुकसान ओले और अधंड़ से हुआ है। बीते साल भी कुल्लू जिला में सेब की फसल 55 फीसदी कम हुई थी।
मौसम के कहर से बैकफुट पर आए घाटी के 70 हजार किसान लगातार दूसरे साल भी उभर नहीं पाए और उन्हें करोड़ों को नुकसान उठाना पड़ा है। बागवानी विभाग की ताजा रिपोर्ट में जिला के सेब बहुल क्षेत्र आनी में मात्र 9740 मीट्रिक टन, निरमंड में 8430, बंजार में 7750, कुल्लू 18850 तथा नग्गर खंड में 35862 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होने का आकलन किया है।
जिला उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. राज कुमार शर्मा ने कहा कि सेब उत्पादन के लिए विख्यात कुल्लू घाटी में इस साल सेब की फसल को बड़ा झटका लगा है। पहले असमय बारिश से मौसम सेब के लिए अनुकूल नहीं रहा है।
इससे फ्लावरिंग पर असर पड़ा और बाद में ओलावृष्टि तथा अधंड़ ने सेब को भारी नुकसान पहुंचाया है। घाटी में अरली तथा रॉयल वैरायटी का सेब मंडियों में आना शुरू हो गया है। उन्होंने सेब की कम पैदावार होने से इसके उम्दा रेट मिलने की उम्मीद जताई है।
साल सेब उत्पादन मीट्रिक टन में
2012-13 142834
2013-14 175764
2014-15 122400
2015-16 143375
2016-17 89901
2017-18 79932 अनुमानित