हिमाचल के सेब ने जुलाई माह की शुरुआत में ही बाजार में दस्तक दे दी है। शिमला समेत विभिन्न मंडियों में अर्ली वैराइटी का सेब पहुंच गया है। अब लोग निचली बेल्ट में होने वाले टाइडमैन और रेड जून किस्मों के सेब का स्वाद चख सकेंगे। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इस बार इन किस्मों को अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं।
रविवार को टाइडमैन वैराइटी के सेब की 25 किलो की पेटी 1300 रुपये दर से बिकी। रेड जून का रेट 500 रुपये तक रहा। हिमाचल में सालाना करीब 3000 करोड़ का सेब होता है। इस कारोबार से करीब 6 लाख परिवार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं। प्रदेश में 15 जुलाई के बाद सेब सीजन रफ्तार पकड़ेगा।
राजधानी शिमला की भट्टाकुफर फल मंडी में करसोग, कुमारसैन और कोटखाई के निचले क्षेत्रों से टाइडमैन और रेड जून किस्म का सेब पहुंचना शुरू हो गया है। रविवार को सेब के चार ट्रक यहां पहुंचे। इसके अलावा सोलन और चंडीगढ़ की मंडियों मेें भी इन दोनों किस्मों का सेब भेजा जा रहा है। मंडी जिले का सेब भी आजादपुर मंडी दिल्ली भेजा जा रहा है।
पिछले वर्ष टाइडमैन किस्म के सेब की एक पेटी शुरू में ही 1700 से 1800 रुपये तक बिकी थी। इस बार यह रेट 1300 रुपये प्रति पेटी ही मिल रहा है। इसका कारण फल उत्पादक क्षेत्रों में इस बार ज्यादा बारिश और ओलावृष्टि होने से फलों का ठीक से विकसित नहीं होना बताया जा रहा है।
आढ़ती एसोसिएशन ढली एवं भट्टाकुफ र के अध्यक्ष चौधरी नाहर सिंह और सेब कारोबारी संजीव सुंटा ने मंडियों में टाइडमैन और रेड जून सेब के पहुंचने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अभी अच्छी गुणवत्ता का सेब नहीं आ रहा है। इस कारण पिछले साल की तुलना में रेट कम हैं। जैसे-जैसे अच्छा सेब आएगा कीमतों में उछाल आएगा। ढली सब्जी मंडी के आढ़ती अक्षय करोल ने बताया कि टाइडमैन सेब की 25 किलो की पेटी 1300 रुपये तक बिकी।
सेब से महंगी बिक रही नाशपाती
टाइडमैन और रेड जून की अरली सेब किस्मों को शुरुआत में अच्छे रेट नहीं मिल रहे। वहीं, नाशपाती को अच्छे दाम मिल रहे हैं। अच्छी किस्म की नाशपाती 2000 रुपये प्रति पेटी तक बिक रही है। प्रदेश के निचले क्षेत्रों से नाशपाती मार्केट में पहुंचना शुरू हो गई है।