पिछले साल प्रदेश में करीब सात लाख टन सेब उत्पादन हुआ था। इस साल उत्पादन 3.5 से 3.75 लाख टन रहने का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश कुमार शर्मा के अनुसार सीजन अभी समाप्त नहीं हुआ है और अंतिम आंकड़े में अंतर कम हो सकता है। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत भी पिछले सीजन की तुलना में खरीद घटी है। पिछले सीजन में इस अवधि तक करीब 49 हजार मीट्रिक टन सेब खरीदा गया था, जबकि इस साल खरीद करीब 32 हजार मीट्रिक टन है। कम आवक से बाजार में आपूर्ति घटने पर कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। हालांकि खुदरा भाव मांग, मंडियों में आवक और बाहरी राज्यों से आने वाले सेब पर भी निर्भर करेंगे। हिमाचल में सेब पर निर्भर अर्थ व्यवस्था करीब 5,000 करोड़ रुपये की है। उत्पादन घटने से बागवानों के साथ ढुलाई, पैकिंग, मजदूरी और मंडी कारोबार पर भी असर पड़ सकता है।
सेब उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। बदलते मौसम में आधुनिक तकनीक और नए रूट स्टॉक अपनाना जरूरी है। जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है। सेब उत्पादन में गिरावट का यह बड़ा कारण है।- जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री