शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधीक्षक ग्रेड-1 के पद नए सृजित नहीं किए जाएंगे, बल्कि ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (बीईईओ) के कार्यालयों में कार्यरत सीनियर असिस्टेंट के पदों को अपग्रेड कर यह व्यवस्था की जाएगी। वहीं क्लर्क/ जेओए (आईटी) के अतिरिक्त पदों की पूर्ति भी विभाग के भीतर ही रिक्त या रैशनलाइजेशन और स्थानांतरण के जरिए की जाएगी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार बीईईओ कार्यालयों में करीब 2105 पद स्वीकृत हैं, जिनमें सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। कई कार्यालयों में आवश्यकता से अधिक स्टाफ होने के बावजूद काम का बोझ कम हो गया है। ऐसे में इन कार्यालयों से अतिरिक्त स्टाफ को स्कूलों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों का हवाला देते हुए विभाग ने कहा है कि शिक्षकों को गैर-शिक्षण कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए, ताकि वे पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। वर्तमान में स्टाफ की कमी के चलते शिक्षकों को प्रशासनिक कार्य भी संभालने पड़ते हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। 151 पदों के अपग्रेडेशन पर सालाना लगभग 81.44 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च अनुमानित है, जबकि क्लर्क/जेओए (आईटी) के पदों के युक्तिकरण से कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव पर सरकार से शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया है।