प्रोजेक्ट निर्माण स्थल का मुआयना करने और स्थानीय लोगों से बात कर पता चला कि अब तक यहां जो निर्माण हुआ है और जो हो रहा है, वह नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान निकाली गई मिट्टी और अन्य मलबा नाले में डाल दिया गया। यही नहीं, चेस्टर हिल के प्रोजेक्ट के साथ लगती पड़ग पंचायत के बेर गांव के लोगों की घासनियों को जाने वाले रास्ते भी प्रोजेक्ट की भेंट चढ़ गए। अब लोगों को लंबे रास्ते से घासनियों तक जाना पड़ रहा है।
नाले के बीचोंबीच प्रोजेक्ट कार्य में लगे मजदूरों के रहने के लिए टीन के शेड तक बना दिए। नाले के साथ ही अस्थायी बिना दरवाजों के शौचालय तक बना दिए। इससे क्षेत्र में गंदगी का आलम है। इसी गंदगी के बीच टीन शेड में प्रवासी मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे रहने को मजबूर हैं।
बेर गांव के लोगों का आरोप है कि नाला बंद होने से उनकी जमीनों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो गई। नाला पार करने वाला पुल टूट गया। समस्याएं यहीं खत्म नहीं हुईं, बल्कि लोगों की घासनियों के साथ लगती प्रोजेक्ट की जमीनें भवनों के निर्माण के लिए 90 डिग्री एंगल में काट दीं, जिससे बरसात में नुकसान होगा। घासनियों के मालिकों ने बताया कि प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में लगे प्रवासी मजदूर उनकी घासनियों में गंदगी डालते हैं, जिससे उन्होंने वहां से पशुओं के लिए घास काटना भी छोड़ दिया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सभी समस्याओं को लेकर कई बार उपायुक्त से मिले, लेकिन न तो प्रशासन ने कोई मुआयना किया और न समस्याओं का हल निकाला।