मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में योजना की प्रगति पर अधिकारियों से रिपोर्ट ली। उन्होंने निर्देश दिए कि सहारा योजना का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचने में किसी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए। सरकार ने योजना के क्रियान्वयन में मानवीय संवेदनशीलता के साथ-साथ डिजिटल निगरानी को भी प्राथमिकता देने का संकेत दिया है। सहारा योजना के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार ने 20.01 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।
इसमें से अब तक 4.46 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सरकार का फोकस उन परिवारों पर है, जिनके सामने गंभीर बीमारी के लंबे इलाज के कारण आय का संकट खड़ा हो जाता है। योजना के तहत बीपीएल और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के चिन्हित गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को हर माह 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। मरीजों के परिचारकों को भी सहायता का प्रावधान है। ई-कल्याण पोर्टल के शुरू होने के बाद योजना के लिए अब तक 4,143 नए आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। विभाग इन आवेदनों को योजना के नियमों के तहत जांचकर स्वीकृत करने की प्रक्रिया में है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबे समय तक इलाज के कारण आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहे परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सहायता वितरण को पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम बनाने पर जोर दिया। नई ऑनलाइन व्यवस्था के बाद सहारा योजना में सरकार के सामने अब लाभार्थियों की संख्या, ई-केवाईसी, आवेदन और भुगतान का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा। मौजूदा आंकड़ों में 4,050 लाभार्थी सिस्टम में स्थानांतरित, 3,958 ई-केवाईसी, 3,723 भुगतान और 4,143 नए आवेदन सरकार के लिए योजना की जमीनी प्रगति मापने का आधार बनेंगे। बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. धनी राम शांडिल, प्रधान सचिव देवेश कुमार, सचिव सीपी वर्मा, निदेशक सुमित किमटा, डॉ. पंकज ललित मौजूद रहे।