अमर उजाला में प्रदेश के 18.84 लाख जनधन खातों में से 1.90 लाख खातों के खाली पड़े होने का मुद्दा प्रमुखता से प्रकाशित होने पर वित्त विभाग ने इसका संज्ञान लिया है। वित्त सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति से इस बाबत विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत बड़ी संख्या में जीरो बैलेंस खातों का मामला उजागर होने के बाद सरकार हरकत में आ गई है। अमर उजाला में प्रदेश के 18.84 लाख जनधन खातों में से 1.90 लाख खातों के खाली पड़े होने का मुद्दा प्रमुखता से प्रकाशित होने पर वित्त विभाग ने इसका संज्ञान लिया है। वित्त सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति से इस बाबत विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में मौजूद जीरो बैलेंस, इनऑपरेटिव और संभावित डुप्लीकेट खातों की पहचान कर उनकी जांच की जाए।
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लंबे समय से निष्क्रिय पड़े खातों को बंद करने और खाताधारकों को सक्रिय बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने के लिए भी बैंकों को कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। वित्त विभाग का मानना है कि जनधन योजना का उद्देश्य केवल खाते खोलना नहीं, बल्कि लोगों को बैंकिंग व्यवस्था, डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से जोड़ना था। ऐसे में बड़ी संख्या में खाली पड़े खाते योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अमर उजाला ने खबर के माध्यम से बताया था कि प्रदेश में खुले 18,84,707 जनधन खातों में 1,90,912 खाते पूरी तरह जीरो बैलेंस हैं।
निजी और स्मॉल फाइनेंस बैंकों में बड़ी संख्या में खाते केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। कई बैंकों में 40 से 75 फीसदी तक जनधन खाते खाली हैं। इसके बाद वित्त विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू की है। वित्त विभाग ने बैंकर्स समिति से कहा है कि यह पता लगाया जाए कि इतने बड़े पैमाने पर खाते जीरो बैलेंस क्यों हैं। स्पष्ट किया जाए कि खाताधारकों को नियमित लेनदेन, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और डीबीटी जैसी सेवाओं से जोड़ने के लिए क्या प्रयास किए गए।