पूरे देश में डीजल की कीमतें कम हो रही हैं लेकिन हिमाचल सरकार इसका फायदा आम जनता तक नहीं पहुंचने दे रही। राज्य सरकार ने डीजल पर वैट बढ़ा दिया है। हिमाचल मंत्रिमंडल ने इसे 1.9 फीसदी प्रति लीटर की दर से बढ़ाया है। अब वैट 9.60 से बढ़ाकर 11.5 प्रतिशत कर दिया गया है। प्रदेश सरकार के अधिसूचना जारी करते ही डीजल का रेट पूरे प्रदेश में करीब एक रुपए प्रतिलीटर कर दर से बढ़ जाएगा।
कैबिनेट ने अवैध भवन निर्माण को वैध करने का रास्ता भी साफ दिया है। इसके लिए शहरी एवं नगर नियोजन संशोधन विधेयक-2014 को धर्मशाला में शीतकालीन सत्र में पेश करने को मंजूरी दे दी है। टीसीपी ड्राफ्ट में कब्जों का शुल्क 70 फीसदी कम करने का प्रस्ताव दिया गया है।
प्रदेश सरकार लोकायुक्त का फैसला न मानने पर अवमानना की कार्रवाई का भी प्रावधान करने जा रही है। इसके लिए शीतकालीन सत्र में पुराना लोकायुक्त विधेयक वापस लेने का फैसला लिया गया और साथ ही लोकायुक्त विधेयक-2014 पेश करने का निर्णय हुआ है।
1.9 प्रतिशत वैट बढ़ाया
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम निर्णय हुए। दो दिन पहले तेल कंपनियों ने डीजल के रेट 84 पैसे प्रति लीटर कम कर दिए तो दूसरी ओर हिमाचल मंत्रिमंडल ने इस पर 1.9 प्रतिशत प्रति लीटर की दर से वैट बढ़ा दिया है। हिमाचल सरकार का कहना है कि यह दर अभी भी पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा से कम है।
हिमाचल सरकार ने पिछले महीने ही कैबिनेट की बैठक में डीजल पर वैट 9.60 से बढ़ा कर 10.40 फीसदी करने का फैसला लिया था, लेकिन अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण बढ़ा हुआ वैट लागू नहीं हो सका था। आज कैबिनेट में फैसला हुआ कि इसे 1.9 प्रतिशत की दर से बढ़ाया जाएगा। इससे राज्य सरकार को करीब 50 करोड़ रुपये की सालाना आय होने का अनुमान है।
शिमला में डीजल के रेट
पहले=======बाद में
52.4=======53.03
धर्मशाला में डीजल के रेट
पहले=======बाद में
52.62======53.61
कैबिनेट के अन्य फैसले
1. अब अन्य योजनाओं में भी खर्च हो सकेगा पैसा। मंत्रिमंडल ने राजकोषीय नियम बदलने को दी मंजूरी, विधानसभा में रखा जाएगा प्रस्ताव।
2. 14 श्रेणियों के विभिन्न पद भरे जाएंगे। हिमाचल मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी।
3. कांगड़ा जिले की उपतहसील हरिपुर का मुख्यालय गुलेर से हरिपुर स्थानांतरित
4. मंडी के पीएचसी निहरी को सीएचसीका दर्जा देने को मंजूरी
5. हिमाचल पैरा पशु चिकित्सा परिषद अधिनिमय-2010 के तहत नियमों और विनियमों को तैयार करने के लिए मंजूरी दी गई