पूछा था कि स्कूलों की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली बसों की निगरानी के लिए स्थानीय प्रशासन ने क्या तरीका निकाला है। यदि कोई तरीका नहीं है तो क्यों नहीं है। यदि कोई तरीका है तो किस तरह बसों की निगरानी की जाती है।
कोर्ट नूरपुर हादसे से जुड़ी बस की जानकारी मांगते हुए पूछा यह भी पूछा था कि उस बस की तकनीकी स्थिति क्या थी व किस वर्ष के मॉडल की बस थी। कोर्ट ने इस मामले में पूर्व महाधिवक्ता श्रवण डोगरा को कोर्ट मित्र नियुक्त किया था व उनसे इस बाबत सुझाव देने को कहा था।
स्कूल शिक्षा बोर्ड ने दायर शपथपत्र में बताया कि बोर्ड के निजी शिक्षण संस्थानों की मान्यता से जुड़े नियमों के तहत इन स्कूलों की परिवहन सुविधा को लेकर कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सभी स्कूलों के बच्चों के यातायात को लेकर जरूरी एडवाइजरी जारी की गई थी।