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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका, न्यायालय ने सुनाया ये फैसला

Fri, 06 Oct 2017 10:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को साल 2009-2010 की आयकर रिटर्न की दोबारा असेसमेंट करने पर रोक लगाने के मामले में झटका लगा है। कोर्ट ने वीरभद्र सिंह की इन्कम टैक्स ट्रिब्यूनल के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। 
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने वीरवार को यह फैसला सुनाया। वीरभद्र सिंह ने इन्कम टैक्स ट्रिब्यूनल के 8 दिसंबर 2016 को पारित आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 

वीरभद्र ने अपील दायर कर उनकी आयकर रिटर्न की दोबारा असेसमेंट पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। हिमाचल हाईकोर्ट में लंबे समय से इस मामले को लेकर सुनवाई चली। 
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बीते सितंबर महीने में कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। वीरवार को हाईकोर्ट ने वीरभद्र सिंह की अपील को खारिज करने का फैसला सुनाया।
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अवैध पेड़ कटान मामले की सुनवाई 22 नवंबर तक टली

हाईकोर्ट में एचपीसीए के खिलाफ  धर्मशाला में दर्ज अवैध पेड़ कटान मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 22 नवंबर तक टल गई है। न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर के समक्ष इस मामले पर सुनवाई हुई। 

एचपीसीए की ओर कोर्ट को बताया गया कि इस केस से जुड़े एक मामले पर 11 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। एचपीसीए ने उनके खिलाफ  सरकारी भूमि से सवा चार सौ पेड़ो के अवैध कटान को लेकर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की अपील की थी। 

मामले के अनुसार धर्मशाला स्थित पेवेलियन होटल के निर्माण में सरकारी भूमि से सवा चार सौ पेड़ो के अवैध कटान की बात सामने आई थी। 29 नवंबर 2013 को इस बाबत प्राथमिकी दर्ज की गई। 

इस मामले में अनुराग ठाकुर, एचपीसीए के सचिव विशाल मरवाह, एचपीसीए के पीआरओ संजय शर्मा, तात्कालिक तहसीलदार जगदीश राम, वन विभाग के रेंज अधिकारी विधि चंद, तात्कालिक कानूनगो कुलदीप कुमार और तात्कालिक पटवारी जगत राम को भी आरोपी बनाया गया है। 

पुलिस ने इस मामले की जांच करने के बाद विशेष न्यायाधीश के समक्ष चालान पेश किया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार यह मामला सिविल नेचर का है लेकिन मुख्यमंत्री कि विशेष दिलचस्पी के चलते इस मामले को क्रिमिनल बनाया गया है।
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