हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बजट बंद करने पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बजट स्वीकृत किया गया है या नहीं। यदि अभी तक नहीं किया गया है तो उसे कब तक स्वीकृत कर जारी किया जाएगा। अदालत ने यह जानकारी राज्य सरकार से शपथपत्र के माध्यम से तलब की है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 1 अगस्त 2023 को निर्धारित की है। केंद्रीय शिक्षा सचिव सहित राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले पर अगली सुनवाई तक सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने अजय श्रीवास्तव के पत्र पर संज्ञान लिया है। पत्र मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखा गया है। अदालत ने केंद्रीय शिक्षा सचिव, राज्य के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव शिक्षा सहित सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रधान सचिव और निदेशक को प्रतिवादी बनाया है।
पत्र के माध्यम से अदालत को बताया गया कि हिमाचल प्रदेश के छात्रावास सुविधा वाले सरकारी स्कूलों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने बजट बंद कर दिया है। यह बजट वर्ष 2011 से मुफ्त छात्रावास और पढ़ाई की सुविधा के लिए दिया जा रहा था। राजधानी शिमला के पोर्टमोर कन्या वरिष्ठ माध्यमिक, नाहन, जोगेंद्र नगर और नगरोटा बगवां में करीब 47 दिव्यांग विद्यार्थियों को यह सुविधा मिल रही थी। दलील दी गई कि दिव्यांग छात्र-छात्राओं को सुविधा मुहैया करवाना और इसे जारी रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। आरोप लगाया गया है कि बजट बंद होने से अभिभावकों को छात्रावास में रहने, खाने-पीने का सारा खर्च वहन करना पड़ेगा।