मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि वित्त विंग की सहमति मिल चुकी है और अगले 10 दिन में प्रशासनिक मंजूरी मिल जाएगी। इस पर हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस काम में पूरे एक साल की असाधारण देरी हुई है। कोर्ट यह उम्मीद करता है कि सक्षम प्राधिकारी व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दायर कर उन परिस्थितियों को स्पष्ट करें, जिनकी वजह से यह देरी हुई। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के प्रोजेक्ट इंजीनियर-इन-चीफ की ओर से दायर हलफनामे से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। विभाग ने बताया कि सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) पूरी न करने पर दो निर्माण कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है।
मैसर्स गणपति बिल्डर्स कंपनी को 1 जुलाई 2021 को 7.72 करोड़ का काम दिया गया था, जो अप्रैल 2022 में 6.68 करोड़ की लागत से पूरा हुआ। हालांकि, डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के दौरान रखरखाव न करने के कारण कंपनी का भुगतान रोक दिया गया और उस पर 23,18,460 का जुर्माना लगाया गया है। डीसीसी बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड को शिमला-वांगतू खंड (किमी 177/000 से 200/000) पर क्रैश बैरियर और रिटेनिंग वॉल के लिए इस कंपनी को अक्तूबर 2020 में 24.20 करोड़ का काम मिला था, जो 27.20 करोड़ में पूरा हुआ। नियमों के मुताबिक डिफेक्ट न हटाने और मेंटेनेंस में फेल रहने के कारण इस कंपनी पर 72,62,310 का भारी जुर्माना लगाया गया है।
जुर्माने के ये दोनों मामले इस समय शिमला की सक्षम अदालतों में लंबित हैं। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि नेशनल हाईवे को अब पूरी तरह यातायात के अनुकूल बना दिया गया है। ढली से नरकंडा के बीच सड़क के गड्ढे भरने और पैचवर्क का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही एनएच-5 पर नालियों की सफाई का काम भी शुरू कर दिया गया है। विभाग ने सबूत के तौर पर कोर्ट में सड़कों की नई तस्वीरें भी पेश कीं।विभाग की रिपोर्ट को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।