कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से पूछा है कि सरकार ने वितरण के लिए खरीदी गई दवाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। जनता को इसके बारे में सूचित करने के लिए सरकार क्या तरीके अपना रही है।
क्या दवाओं के वितरण संबंधी विस्तृत जानकारी जनता के ध्यान में लाने हेतु साइन बोर्ड उपयुक्त स्थान पर लगाए गए हैं या नहीं। दवा वितरण में कोताही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ क्या स्वास्थ्य विभाग ने कोई करवाई की है।
इस मामले पर अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी
प्रदेश हाईकोर्ट ने इससे पहले भी स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिए थे कि वह हलफ नामे के माध्यम से कोर्ट को बताएं कि इस वित्त वर्ष में वितरण के लिए दवाओं की खरीद पर कितना पैसा खर्च किया गया है। शपथ पत्र में यह भी बताना होगा कि क्या डॉक्टर मरीजों को दवा लिखते समय मुफ्त वितरण के लिए खरीदी गई दवाएं लिखते हैं या नहीं? क्या डॉक्टर मुफ्त दवाइयों की उपलब्धता के बारे मेें मरीजों को जानकारी देते हैं?