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पाठ्यक्रम में जातिवाद का पाठ पढ़ाने पर मचा बवाल, विद्यार्थी परिषद के तेवर कड़े

Tue, 09 Jan 2018 12:40 PM IST
राकेश भारद्वाज, अमर उजाला, धर्मशाला
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हिमाचल के कॉलेजों में स्नातक के छठे सेमेस्टर के अंग्रेजी विषय के पाठ्यक्रम में जातिवाद का पाठ पढ़ाने का मामला सामने आने के बाद बवाल मच गया है। ‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद कई छात्र, सामाजिक संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। 

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सोशल मीडिया में भी सोमवार को यह मामला छाया रहा। पिछले छह साल से सूबे के कॉलेजों में पढ़ाए जा रहे इस पाठ्यक्रम पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कड़ी आपत्ति जताते हुए विशेषज्ञों से समीक्षा करवाने की मांग की है। 

एचपीयू और शिक्षा विभाग ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पाठ्यक्रम की समीक्षा की बात कही है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत सूबे के कॉलेजों में पढ़ाए जा रहे आंदोलनकारी एवं साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा ‘जूठन’ में कई शब्दों पर आपत्ति जताई गई है।

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ओमप्रकाश वाल्मीकि ‘जूठन’ से आए थे चर्चा में

साल 2011 में प्रदेश में रूसा के तहत यूजी में अंग्रेजी के छठे सेमेस्टर में ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा ‘जूठन’ को शामिल किया गया। हिंदी भाषा में लिखी गई जूठन का अंग्रेजी में अरुण प्रभा मुखर्जी ने अनुवाद किया है। 

पुस्तक में ओमप्रकाश वाल्मीकि के जीवन के अनुभवों को बताया गया है, तो वहीं अनुवाद के बाद भी इस पुस्तक में कई प्रतिबंधित शब्दों का प्रयोग हुआ है।ओमप्रकाश वाल्मीकि अपनी आत्मकथा ‘जूठन’ से काफी चर्चित हुए थे।

इसमें उन्होंने पिछड़ी जाति के लोगों पर लागू अघोषित कानूनों के बारे में बताया है। साथ ही अत्याचारों के बावजूद ओमप्रकाश वाल्मीकि के आंदोलनकारी और साहित्यकार बनने के बारे में बताया गया है।

वर्ष 1997 में जूठन प्रकाशित हुई थी। वाल्मीकि का जन्म 30 जून, 1950 को मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) जिले के बरला गांव में हुआ था, जबकि 17 नवंबर, 2013 को उनका निधन हुआ था।
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पूरी पुस्तक की हो समीक्षा : कौल

एबीवीपी के संगठन मंत्री कौल नेगी ने कहा कि अंग्रेजी के छठे सेमेस्टर में पढ़ाई जा रही ‘जूठन’ की विषय विशेषज्ञों से समीक्षा करवाई जानी चाहिए। क्या इस पाठ्यक्रम को पढ़ाना जरूरी है। यदि जरूरी नहीं है, तो इसे पाठ्यक्रम से हटाया जाना चाहिए। इस संबंध में प्रदेेश सरकार के समक्ष मांग उठाई जाएगी।

पाठ्यक्रम की होगी समीक्षा : अमरदेव
हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरदेव ने बताया कि मामला उनके ध्यान में आया है। इस पाठ्यक्रम की समीक्षा करवाई जाएगी। इसके बाद निर्णय लिया जाएगा।

छह साल से नहीं आई शिकायत : गिरिजा
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की डीन ऑफ स्टडी गिरिजा शर्मा ने बताया कि साल 2011 में अंग्रेजी के पाठ्यक्रम में जूठन को शामिल किया गया था। छह साल से इसको लेकर कोई शिकायत नहीं आई। अब यदि किसी को इस संबंध में कोई आपत्ति है तो इसकी समीक्षा की जाएगी।
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