हाईकोर्ट ने सीबीआई को भ्रष्टाचार और मनी लॉड्रिंग के मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ की जा रही जांच का विस्तृत ब्योरा पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने सीबीआई को स्पष्ट करने को कहा है कि दो वर्ष में क्या जांच की गई है।
आयकर विभाग ने अदालत के समक्ष सीलबंद रिपोर्ट पेश भी की। वहीं, याची गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज ने आरोप लगाया कि सीबीआई मामले में प्राथमिकी दर्ज करना चाहती है, लेकिन सीबीआई निदेशक वीरभद्र सिंह को बचाने में लगे हैं।
सीबीआई निदेशक पर वीरभद्र को बचाने का आरोप
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को वीरभद्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मामला इस कोर्ट के क्षेत्राधिकार से बाहर है। दूसरी तरफ याची के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।
शिकायत के साथ कई दस्तावेज सीबीआई को मुहैया कराए गए हैं, यदि इन्हें अदालत में पेश किया जाए तो यह वीरभद्र को दोषी ठहराकर सजा देने के लिए पर्याप्त होंगे। आयकर विभाग ने जांच में पाया है कि वीरभद्र के पास बीस करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति आय के ज्ञात स्रोत से अधिक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई निदेशक वीरभद्र को बचा रहे हैं। इसी वजह से कि पर्याप्त साक्ष्य के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है।
यह है मामला
याचिका में कहा गया है कि वीरभद्र द्वारा दाखिल आयकर रिटर्न में वर्ष 2009-10 में 7,35,000 रुपये, वर्ष 2010-11 में 15,00,000 रुपये और 2011-12 में 25,00,000 रुपये बताए गए थे, लेकिन वर्ष 2012 में इसमें संशोधन करते हुए खेती से आय में 18 से 30 गुणा तक बढ़ोतरी दिखाई गई।
खेती से कुल आय बढ़कर तीन साल में ही 6.1 करोड़ रुपये हो गई। वीरभद्र पर केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग करके निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का भी आरोप है।