न्यायाधीश तरलोक चौहान ने प्रार्थी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह माना जा सकता है कि अनुशासित बल के एक सदस्य याचिकाकर्ता को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद उसने सुधार की कोई संभावना नहीं दिखाई।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बिना किसी ठोस कारण के अनुपस्थित रहे पुलिस कर्मी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति वाले आदेशों में फेरबदल करने से इनकार कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक चौहान ने प्रार्थी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह माना जा सकता है कि अनुशासित बल के एक सदस्य याचिकाकर्ता को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद उसने सुधार की कोई संभावना नहीं दिखाई।
विज्ञापन
अनुशासनात्मक प्राधिकारी याचिकाकर्ता की जांच रिपोर्ट को देखने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि वह जानबूझकर नौ मार्च, 2019 से अपने कर्तव्यों में शामिल होने में विफ ल रहा था। बिना किसी उचित कारण के 599 दिनों से अधिक समय तक लगातार अनुपस्थित रहा, जो अनुशासित बल के सदस्य का हिस्सा होने के कारण गंभीर कदाचार के रूप में था। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति आदतन थी।