परीक्षा पास न करने वाले उम्मीदवारों ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के समक्ष आवेदन दायर कर आरोप लगाया था कि आयोग ने न्यूनतम योग्यता की आड़ में कंप्यूटर शिक्षा में उच्च डिग्रियां व डिप्लोमा प्राप्त अभ्यर्थियों को बिना कारण अयोग्य घोषित कर दिया।
इसके परिणामस्वरूप लिखित व टाइपिंग परीक्षा में उनसे कम अंक वालों का चयन कर लिया। ट्रिब्यूनल ने याचिका का निपटारा करते आदेश दिए थे कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत ही पद भरे जाएं।
ट्रिब्यूनल के निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई। तब हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए ट्रिब्यूनल द्वारा पारित निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी थी।