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हाईकोर्ट ने पूछा, हाउस टैक्स वसूलने में ढील क्यों बरत रहा निगम?

Fri, 18 Sep 2015 10:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हाईकोर्ट ने शिमला शहर में हाउस टैक्स की वसूली में ढील बरतने को गंभीरता से लिया है। अदालत ने आयुक्त नगर शिमला, उपायुक्त शिमला और तहसीलदार रिकवरी को आदेश दिए हैं कि वे तुरंत प्रभाव से डिफाल्टरों के खिलाफ कार्यवाही करे।
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नगर निगम शिमला द्वारा चार सितंबर को दायर शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद नगर निगम ने 10,71,80,839 रुपये का गृह कर वसूल लिया है। शेष 415 डिफाल्टरों से 86,91,715 रुपये गृह कर वसूला जाना है। अदालत ने मामले की आगामी सुनवाई तक ताजा रिपोर्ट दायर करने के आदेश भी दिए है।

नगर निगम टैक्स डिफाल्टरों के खिलाफ नगर निगम ‘एमसी एक्ट 1994’ के तहत कार्रवाई करने का फैसला पहले ही ले चुका है। नगर निगम ने 31 मार्च 2012 तक लंबित टैक्स की वसूली के लिए डिफाल्टरों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गौरतलब है कि नगर निगम की आय का मुख्य जरिया हाउस टैक्स और शहर की दुकानों से आने वाला किराया है।
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ऐसे में अगर हाउस टैक्स लंबित रहता है तो एमसी को कार्य करवाने में दिक्कत भी आती है। लेकिन टैक्स वसूली को लेकर नगर निगम की सुस्ती समझ से परे है। लोगों का कहना है कि टैक्स वसूली और अदायगी समय पर हो तो शहर के कार्य जल्द होंगे तथा हजारों लोगों को राहत भी मिलेगी। पैसों की कमी से कुछ कार्य लंबे अरसे से लटके पड़े हैं।
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