देहदान को महादान कहा जाता है। एक मृत देह से न जाने कितने लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है। लेकिन हिमाचल में देह दान का अपमान हो रहा है। सरकार के पास देह दान पर पार्थिव शरीर को अस्पताल तक ले जाने की व्यवस्था तक नहीं है।
इस संवेदनहीनता को देखते हुए हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और निदेशक को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर पक्ष रखने को कहा है।
कांगड़ा जिले के शाहपुर निवासी शमशेर सिंह ने अपनी दायर जनहित याचिका में कहा है कि अगर देह दान करने वाले व्यक्ति के परिजन पार्थिव शरीर को लेकर अस्पताल या मेडिकल कॉलेज जाते हैं तो उन्हें सरकार की ओर से पांच हजार रुपये दिए जाते हैं।
यह उनके लिए और भी पीड़ादायक और देहदान करने वाले व्यक्ति के लिए अपमानजनक है। दान किए गए शरीर पर कई तरह के प्रयोग किए जाते हैं और कुछ अंग प्रत्यारोपण में भी काम आते हैं। लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण पार्थिव शरीर का सही ढंग से प्रयोग नहीं हो रहा है।
प्रार्थी ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि राज्य सरकार को देह दान करने वाले के पार्थिव शरीर को अस्पताल या मेडिकल कॉलेज तक ले जाने की व्यवस्था करने के आदेश दिए जाएं, ताकि मृतक के परिजनों को परेशानी न हो।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने इस मामले में प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है। इस मामले पर सुनवाई आगामी एक सप्ताह के बाद निर्धारित की है।