याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इन दोनों क्षेत्रों में पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 को समाप्त होना था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने मई 2026 में ही चुनाव करवा लिए। सरकार ने 24 जून को अधिसूचना जारी कर पुरानी पंचायतों को भंग कर दिया और नई पंचायतों की पहली बैठक 18 अक्तूबर के बजाय 27 जून तय कर दी। इससे एक साथ दो निर्वाचित पंचायतें अस्तित्व में आ गईं और मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल समय से पहले समाप्त हो गया। याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 243-ई का हवाला देते हुए कहा कि किसी पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक से पूरे पांच वर्ष का होता है और इसे कानून में संशोधन कर भी घटाया नहीं जा सकता। सरकार की ओर से जनवरी 2026 में किया गया नया संशोधन पिछली तारीखों से लागू नहीं हो सकता।
राज्य सरकार ने पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2025 की धारा 120(4) का हवाला देते हुए दलील दी कि विशेष परिस्थितियों में इन क्षेत्रों की पंचायतों का कार्यकाल राज्य की अन्य पंचायतों के साथ समाप्त होना चाहिए। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं के पास एक निहित कानूनी अधिकार है। इसलिए 24 जून 2026 की अधिसूचना दोषपूर्ण है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं और अन्य लोगों के पद पर बने रहने के अधिकार को इस तरह छीना नहीं जा सकता।