इन पदों को भरने के लिए शैक्षणिक योग्यता जमा दो और किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्था से कंप्यूटर की डिग्री या डिप्लोमा रखा गया था। प्रार्थी का यह आरोप है कि परीक्षा परिणाम घोषित करने के बाद पात्रता की शर्तों को दरकिनार करते हुए अपात्र अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया।
एक कंप्यूटर की दुकान से प्रमाणपत्र हासिल करने वालों को भी जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के पद पर नियुक्त किया गया। प्रार्थी ने इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए जाने बाबत हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। प्रार्थी का यह भी आरोप है कि इन पदों को भरने के लिए साक्षात्कार में भी हेराफेरी की गई।
अपने चहेतों को साक्षात्कार में अधिक अंक देते हुए उनकी नियुक्ति सुनिश्चित की गई। प्रार्थी के अनुसार भारत सरकार ने साक्षात्कार में होने वाली हेराफेरी को रोकने और योग्य लोगों को नियुक्त करने के उद्देश्य से 15 अगस्त 2016 को यह निर्णय लिया था कि तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों को भरने के लिए साक्षात्कार
नहीं रखा जाएगा फिर भी साक्षात्कारों का आयोजन कर सीधे तौर पर दर्शाता है कि अपने चहेतों को साक्षात्कार के माध्यम से इन पदों पर नियुक्त किया गया। मामले पर अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी।