हिमाचल हाईकोर्ट में रेणुका बांध प्रबंधन की याचिका खारिज हो गई है। प्रबंधन को सात दिन के भीतर विस्थापितों को मुआवजा राशि अदा करने के निर्देश दिए गए हैं। ये निर्देश उच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश पावर कार्पोरेशन के भू-अर्जन अधिकारी (एलएओ) शिमला को देते हुए संबंधित विस्थापितों को मुआवजे की पूरी राशि अदा करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि सैनधार क्षेत्र के मोजा जाइंचा मंझाई की करीब 79 हेक्टेयर भूमि के अवार्ड को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय ने बांध प्रबंधन को तीन माह का समय दिया था। बीते 5 अगस्त को सुनाए गए इस फैसले के बाद तीन माह के भीतर संबंधित विस्थापितों को मुआवजे की राशि अदा नहीं की गई।
बांध प्रबंधन ने उच्च न्यायालय में समय सीमा बढ़ाए जाने को लेकर याचिका दायर की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने विस्थापितों के पक्ष का सम्मान करते हुए बांध प्रबंधन की याचिका को खारिज करते हुए बांध परियोजना के एलएओ को सात दिन के भीतर मुआवजा राशि अदा करने के आदेश दिए। मुआवजा राशि करीब 29 करोड़ रुपये आंकी गई है।