सिपहिया की पैरवी कर रहे वकील अजय शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक केस का फैसला नहीं होता, तब तक चुनाव नहीं करवाए जाएं। एक्ट में प्रावधान है कि निलंबन का जितना समय बीता उतना समय का कार्यकाल फिर से पीड़ित को मिलना चाहिए।
इसलिए हमने हाईकोर्ट में मांग रखी है कि पीड़ित पक्ष को फिर से अपने पद पर काम करने के लिए चार माह का समय दिया जाए और तब तक चुनाव नहीं होने चाहिएं। हमने हाईकोर्ट में यह भी कहा है कि सरकार की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस गलत है। इसे खत्म किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि रविवार को कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के नए निदेशक मंडल के चयन के लिए अतिरिक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी थी। कार्यक्रम के तहत मतदाताओं की अंतिम सूची का प्रकाशन 28 अगस्त को होना था।
14 सितंबर तक नामांकन दाखिल होने थे। 24 सितंबर को चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद 26 सितंबर को मतदान होना था। इसी दिन चुनाव परिणाम घोषित किए जाने थे। चुनाव प्रबंधक, रिटर्निंग अफसर और पंजीयक अधिकारी तक नियुक्त कर दिए गए थे।