डेढ़ अरब के कारोबार को छूने वाले सोलन के हिम सोना टमाटर को बंगलूरू टमाटर से तगड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। राष्ट्रीय कृषि बाजार में दक्षिण भारत में साम्राज्य स्थापित करने के बाद बंगलूरूटमाटर ने दिल्ली तक पहुंच बना ली है। हिमाचल के मुकाबले दिल्ली की मंडी में बंगलूरू का टमाटर कम दाम में उपलब्ध हो रहा है।
इसकी वजह से सोलन के किसानों को टमाटर के पूरे दाम नहीं मिल पा रहे हैं। यही वजह है जो करीब 15 हजार क्रेट प्रतिदिन की बिक्री को छूने के बाद अब टमाटर की मांग कम होकर औसतन दस हजार क्रेट पर ठहर गई है। प्रति क्रेट दाम सौ से 450 रुपये मिल रहे हैं। पिछले साल एक क्रेट का औसतन दाम 1400 रुपये तक मिल रहा था। जबरदस्त मुनाफे को देखते हुए इस बार किसानों ने टमाटर की खूब पैदावार की।
अब घाटा पड़ने की वजह से ज्यादातर किसान मायूस हो गए हैं। किसानों की फसलें खेतों में खड़ी हैं लेकिन बाजार में जोखिम होने की वजह और घाटे के डर से किसान टमाटर को मंडी तक नहीं पहुंचा रहे हैं। पिछले दिनों हिमाचल में हुई भारी बारिश को टमाटर की मांग कम होने की मुख्य वजह माना जा रहा है। बारिश के दौरान बंगलुरू के टमाटर ने राष्ट्रस्तर पर बड़ी मंडियों में अपनी जगह बना ली और अब कम दाम की वजह से कारोबारियों के लिए यह पहली पसंद बन गया है।
दाम में आई 1100 रुपये की कमी- सोलन में 2017 में टमाटर का सीजन भरपूर रहा था। एक क्रेट के औसतन 1400 रुपये मिल रहे थे। पूरे साल में करीब डेढ़ अरब का कारोबार हुआ। इस सीजन में औसतन दाम 300 रुपये प्रति क्रेट है। इसकी वजह से दो महीनों के दौरान अब तक सिर्फ दस करोड़ रुपये का ही कारोबार सोलन मंडी से हो पाया है। अब तक तीन लाख 57 हजार 962 क्रेट बेचे गए हैं। इनमें करीब 85 हजार 911 क्विंटल टमाटर भरे थे।
हिम सोना नहीं पहुंचा पाकिस्तान- चंडीगढ़ और अमृतसर के रास्ते पाकिस्तान तक पहुंच बनाने वाले हिम सोना की सप्लाई इस बार सरहद पार नहीं हो सकी है। बड़े स्तर के कारोबारी सोलन से जा रही टमाटर की खेप को देश की विभिन्न मंडियों में ही खपा रहे हैं। 2017 के बाद पाकिस्तान ने पिछले दो सालों में टमाटर का आयात नहीं किया है। इससे पूर्व 2017 तक हर सीजन में हजारों क्रेट पाकिस्तान जाते रहे हैं।
बंगलूरू टमाटर से मिल रही टक्कर- सब्जी मंडी सोलन के सचिव प्रकाश कश्यप का कहना है कि अभी तक पाकिस्तान से डिमांड नहीं आई है। यदि डिमांड आती है तो कारोबारियों के माध्यम से इसकी सप्लाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि बंगलूरू के टमाटर ने राष्ट्रीय स्तर पर कृषि बाजार में टमाटर को हाइजैक कर लिया है। सोलन से जा रहे टमाटर को कड़ी स्पर्धा से जूझना पड़ रहा है।
कोल्ड स्टोर न होने का खामियाजा भुगत रहे किसान- किसानों के लिए सबसे बड़ी विडंबना यहां कोल्ड स्टोर का न होना है। जो टमाटर खेतों से तोड़े जा रहे हैं किसानों को उन्हें औने-पौने दाम पर बेचना मजबूरी बन रहा है। किसान दाम बढ़ने तक इंतजार नहीं कर पा रहे हैं। लंबे समय से कोल्ड स्टोर की जरूरत सोलन में महसूस हो रही है।