अमेरिका से मंगवाई गई है 24 करोड़ रुपये की मशीन, इंस्टाॅल करने का काम शुरू
कैंसर अस्पताल में सितंबर से मरीजों को मिलेगी सुविधा, पीजीआई चंडीगढ़ और प्राइवेट अस्पताल में नहीं जाना पड़ेगा
शिमला में ही सस्ती दरों पर मिलेगा आधुनिक इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के कैंसर अस्पताल में सितंबर से ही अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलेरेटर (लिनेक) मशीन की सुविधा शुरू होने जा रही है। इस मशीन के लगने के बाद फेफड़े, स्तन और प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज अब शिमला में ही संभव होगा। मरीजों को इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
आईजीएमसी प्रबंधन के अनुसार मशीन की इंस्टालेशन करने का काम शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि सितंबर के पहले हफ्ते से मरीजों का इलाज इस मशीन से शुरू कर दिया जाएगा। अब तक कैंसर के रेडिएशन इलाज के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में दो से चार लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। कई बार यह खर्चा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। पीजीआई में भी इसी मशीन से इलाज करवाने पर करीब 10 से 15 हजार रुपये खर्च होते हैं। आईजीएमसी के कैंसर अस्पताल में यह सुविधा बेहद सस्ती दरों पर उपलब्ध होगी और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को काफी राहत मिलेगी। करीब 24 करोड़ रुपये की यह मशीन अमेरिका से मंगवाई गई है। मशीन शिमला पहुंच चुकी है और इसे इंस्टॉल करने का काम तेजी से चल रहा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अगले तीन महीनों में इसे पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा।
ऐसे काम करती है लिनेक एक्सीलेरेटर मशीन
लीनियर एक्सीलेरेटर (लिनेक) मशीन रेडिएशन ट्रीटमेंट में बेहद आधुनिक तकनीक से काम करती है। उच्च-ऊर्जा विकिरण उत्पन्न करती है, जो सीधा कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आसपास के स्वस्थ ऊतकों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाती। लिनेक मशीन की सटीकता इतनी अधिक होती है कि यह केवल ट्यूमर पर रेडिएशन फोकस करती है, जिससे मरीज को कम साइड इफैक्ट होते हैं और इलाज के परिणाम भी बेहतर मिलते हैं। यह तकनीक स्तन, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में विशेष रूप से प्रभावी मानी जाती है।
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सितंबर में मिल सकती है सुविधा
कैसर अस्पताल आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक मनीश गुप्ता ने बताया कि लीनियर एक्सीलेरेटर (लिनेक) मशीन के शुरू होने से हिमाचल के कैंसर मरीजों को न केवल सस्ता इलाज मिलेगा, बल्कि उन्हें समय और लंबी दूरी की परेशानियों से भी राहत मिलेगी। यह सुविधा खासकर उन मरीजों के लिए राहत बनकर आएगी जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा पाते।