नगर निगम की कर्मचारियों ने आवास उपलब्ध करवाने को लेकर हाईकोर्ट में दायर की है याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नगर निगम कर्मचारियों को आवास उपलब्ध कराने से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। म्युनिसिपल वर्कर फेडरेशन शिमला की याचिका पर न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत में दलीलें सुनी गईं। सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके विभाग के पास शिमला में कोई भी खाली आवास उपलब्ध नहीं है। इस पर नगर निगम की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि नगर निगम के अनुसार ऑल इंडिया रेडियो विभाग के पास कुछ संपत्ति उपलब्ध हो सकती है। उन्होंने अदालत को बताया कि इस संबंध में ऑल इंडिया रेडियो विभाग को पक्षकार बनाने के लिए अलग से आवेदन दायर किया जाएगा। उधर, अदालत ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद मामले को शीतकालीन अवकाश के बाद सूचीबद्ध करने के आदेश दिए। वही यह भी कहा कि इस बीच नगर निगम कोई आवेदन दाखिल करता है तो उसे रिकॉर्ड पर रखा जाए। लिहाजा अब इस मामले की अगली सुनवाई अवकाश के बाद होगी।
शहर के सब्जी मंडी स्थित सूजी लाइन में कर्मचारियों के आवास तोड़कर यहां पर 400 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी कांप्लेक्स का निर्माण कार्य किया जाना है। इस प्रस्तावित मल्टी कांप्लेक्स में नगर निगम के सभी दफ्तरों को एक ही छत के नीचे लाने की योजना सरकार की है। इस कांप्लेक्स में नगर निगम के दफ्तर, दुकानों और पार्किंग सुविधा का प्रावधान एक ही छत के नीचे किया जाना है। इस परियोजना से न सिर्फ प्रशासनिक कामकाज सुचारु होगा बल्कि निगम को भी इससे आय होगी। हालांकि दूसरी ओर सब्जी मंडी में रह रहे नगर निगम के 52 कर्मचारियों ने आवास खाली करने से पहले ही इन्कार कर दिया है। म्युनिसिपल वर्कर फेडरेशन शिमला के चेयरमैन आशा राम ने कहा कि जब तक उन्हें वैकल्पिक आवास की पुख्ता व्यवस्था नहीं कर दी जाती तब तक मौजूदा आवास नहीं छोड़ेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले चार महीनों से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। दूसरी ओर नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने शहर में एआईआर, पीडब्ल्यूडी के खाली पड़े आवासों को लेकर बातचीत कर रहे हैं जिससे कर्मचारियों को राहत मिल सके और परियोजना का कार्य जल्द शुरू हो सके।