कड़े ऑपरेशन टले, डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश से डीडीयू में ओपीडी पूरी तरह ठप, आईजीएमसी में कंसल्टेंट ने संभाला मोर्चा
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रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी नहीं दी सेवाएं, स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) और डीडीयू अस्पताल में शुक्रवार को ओपीडी सेवाएं बाधित रहीं। इसके अलावा कई बड़े ऑपरेशन नहीं हुए। आईजीएमसी में सीनियर डॉक्टरों ने हालांकि ओपीडी में सेवाएं दीं लेकिन भारी भीड़ के चलते मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। वहीं डीडीयू अस्पताल में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं। वहीं जिले में भी प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद रही।
आईजीएमसी में मरीज और डॉक्टर के बीच हुई मारपीट के बाद सरकार ने एक चिकित्सक को बर्खास्त कर दिया था। इससे रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (आरडीए) और हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन भड़क गई है। दोनों संगठनों ने वीरवार को ही सामूहिक अवकाश पर जाने का एलान कर दिया था। क्षेत्रीय अस्पताल डीडीयू में मेडिकल ऑफिसर के सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर जाने से ओपीडी बंद रही, अस्पताल में सिर्फ आपातकालीन सेवाएं चलीं। पर्ची काउंटर पर दोपहर बारह बजे तक ढाई सौ से अधिक मरीजों पर्चियां बना ली थीं लेकिन जब पता चला की ओपीडी में डॉक्टर नहीं है तो मरीज बिना उपचार करवाए घर चले गए।
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आईजीएमसी में साढ़े चार सौ से अधिक जूनियर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर रहे। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। अस्पताल की ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों के उपचार का पूरा जिम्मा कंसल्टेंट डॉक्टरों (प्रोफेसर) पर रहा। इसमें कुछ डॉक्टरों को मरीजों को देखने और रूटीन राउंड के लिए भी जाना पड़ा। इसके अलावा अस्पताल के आधे चिकित्सक शीतकालीन अवकाश पर हैं। लिहाजा अन्य डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश पर जाने से शुक्रवार को अस्पताल में हालात पूरी तरह बिगड़ गए। अस्पताल में बिना रेजिडेंट चिकित्सकों के सिर्फ जरूरी ऑपरेशन ही हुए अन्य ऑपरेशन टालने पड़ा। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन मारपीट मामले में आरोपी बनाए डाॅ. राघव की बर्खास्तगी को बहाल करने की मांग कर रही है।
मगनु देवी का नहीं हुआ आंखों का ऑपरेशन
डीडीयू (दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल) में सुबह नौ बजे उपचार करवाने आए चौपाल के बुजुर्ग दंपति को दस बजे पर्ची काउंटर के खुलने पर मालूम हुआ कि आज डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठेंगे। 75 वर्षीय मगनु देवी को आंखों का ऑपरेशन करवाना था, उनके पति साढ़े दस बजे अस्पताल के गेट पर ओपीडी खुलने का इंतजार करते रहे बाद में घर लौट गए।
न दांत दर्द की दवा मिली न आंखें दिखा पाए डीडीयू में अर्की की 60 वर्षीय रत्नी दांत का उपचार करवाने अपनी बहु के साथ आई थी। ओपीडी बंद होने का पता चला तो मायूस हो गई। करसोग के 84 वर्षीय बुजुर्ग बालक राम ने बताया कि वह आंख दिखाने आए थे लेकिन डॉक्टर नहीं मिले।
लाठी के सहारे आई बेगमु भी थी परेशान
डीडीयू अस्पताल आई 70 साल की बेगमु देवी अकेले ही हाथ में लाठी पकड़ कर अस्पताल में पेट दर्द का उपचार करवाने आई थी। इन्हें इमरजेंसी में दिखाकर दवाई लेनी पड़ी।
आईजीएमसी में मरीजों को घंटों करना पड़ा इंतजार आईजीएमसी के बाल रोग विभाग में 12 बजे पल्लू नंदा अपने भतीजे को पेट दर्द होने पर अस्पताल लाई थी। शोघी के पिंकू और उनकी पत्नी अपने बेटे के साथ रिपोर्ट दिखाने के लिए डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही थी। नारकंडा से बेटी लक्ष्मी को लेकर आए बलधर थापा ने बताया कि वह एक घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं। करसोग से चार साल की बच्ची नव्या का उपचार करवाने करसोग से आई प्रियंका ने बताया कि वह डेढ़ घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रही हैं। डाॅक्टर ने टेस्ट लिखे तो अब दोबारा अस्पताल आना पड़ेगा। मेडिसिन विभाग में एक वरिष्ठ चिकित्सक, ऑर्थो, सर्जरी, ईएनटी और मनोरोग विभाग में भी एक या दो चिकित्सक ही ओपीडी में उपलब्ध रहे।