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Shimla News: प्लेग बीमारी से बचाव की तैयारियों का लिया जायजा

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राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र बंगलुरू की टीम ने रोहड़ू अस्पताल का किया दौरा
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डीडीयू अस्पताल में सीएमओ से भी की बैठक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्लेग बीमारी के लक्षण और इलाज की तैयारियों का जायजा लेने के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल) की टीम जिला शिमला के दौरे पर है। दो सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को शिमला के डीडीयू अस्पताल का दौरा भी किया है। टीम ने शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला डॉ. राकेश प्रताप के साथ बैठक की।
बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की टीम जिला शिमला के सिविल अस्पताल रोहड़ू पहुंची थी। टीम में अनुसंधान सहायक अनोक मेल्विन मार्शल और चिकित्सा अधिकारी डॉ. सयाना भास्करन ने 16 से 19 अप्रैल तक प्लेग निगरानी की गतिविधियों के लिए रोहड़ू का दौरा किया। एनसीडीसी द्वारा चार प्रशिक्षित स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों से बात भी की। टीम में शामिल अनुसंधान सहायक अनोक मेल्विन मार्शल ने बताया कि प्लेग बीमारी से बचाव के लिए नियमित आधार पर गतिविधि संचालित करने की जरूरत है। टीम ने इस दौरान प्लेग सूचकांक तांगनु, खोरसु गांव का भी दौरा किया। बताया कि टीम शनिवार को भी निगरानी जारी रखेगी।
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इनसेट
विभिन्न प्रकार के होते हैं प्लेग
मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला डॉ. राकेश प्रताप ने बताया कि आमतौर पर लक्षणों में बुखार, ठंड लगना और कमजोरी शामिल हैं। इसके अलावा ब्यूबोनिक प्लेग में सूजन की समस्या पेश आती है। सेप्टिसेमिक प्लेग में बुखार, ठंड लगना, अत्यधिक कमजोरी, पेट में दर्द, त्वचा और अन्य अंगों में रक्तस्राव होता है। इसके अलावा न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसमें सांस लेने में दिक्कत, खांसी, सीने में दर्द, खून वाला थूक जैसी समस्याएं पेश आती हैं।
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इनसेट
ऐसे बचे प्लेग से
चिकित्सकों का कहना है कि पिस्सू, बीमार और मृत जानवरों के संपर्क में कम आएं। इसके अलावा लंबी पेंट पहने, वहीं पिस्सू नियंत्रण का उपयोग करके जानवरों को बचाएं।
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