साथ ही कांगड़ा में स्वास्थ्य विभाग में बायोमीट्रिक मशीनों की खरीद पर सवाल उठे थे। दोनों मामलों में स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने जांच के आदेश जारी कर दिए थे।
आयुर्वेद मामले में रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की गई है। जबकि बायोमीट्रिक मशीनों की खरीद के मामले में विशेष सचिव स्वास्थ्य डा. निपुन जिंदल की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की गई है जो 15 दिन में इस मामले में जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी।
रिपोर्ट में अगर गड़बड़ी की पुष्टि हुई तो दोषियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के लिए विभागीय स्तर पर भी दोहरी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर बताया कि कांग्रेस सरकार के समय में कांगड़ा स्थित महालक्ष्मी इंटरप्राइसेज से मशीनों की खरीद हुई थी।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इन मशीनों की कीमत अलग-अलग रही है। ऐसे में मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्टाचार हुआ है तो बड़े स्तर के अधिकारी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
मंत्री ने बताया कि 2017 में चुनावों से ऐन पहले 66 संस्थानों में 82 बॉयोमीट्रिक खरीदी थीं। इसी तरह से 2018 में 18 और 2019 में 2 मशीनें खरीदी गई हैं।