जीडीओ डॉक्टर्स को पीजी में प्रवेश का रास्ता साफ साफ हो गया है। पीजी की काउंसलिंग रद्द करने के आर्डर को स्वास्थ्य विभाग ने वापस ले लिया है। मेडिकल कॉलेजों में पीजी करने के बाद अब यह एमबीबीएस डॉक्टर विशेषज्ञ बन सकेंगे।
3 मई को मेडिकल कॉलेजों में पीजी कक्षाओं में प्रवेश लेने गए जीडीओ डॉक्टर्स को विभाग ने काउंसलिंग रद्द होने का तर्क देकर वापस भेज दिया था। इसके बाद से काउंसलिंग में भाग लेने वाले डॉक्टरों में बवाल मच गया।
अमर उजाला ने इस मामले को छह और सात मई को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। सरकार के निर्देश पर काउंसलिंग रद्द करने के आर्डर को वापस लेकर इन्हें प्रवेश देने के आदेश जारी हुए हैं।
प्रदेश के अस्पतालों में सेवाएं दे रहे इन-सर्विस डॉक्टरों, जिनका पीजी के लिए चयन हुआ था, उन पर दोहरी मार पड़ने लगी थी। पहले स्नातकोत्तर में दाखिले से हाथ धोना पड़ा, बाद में ज्वाइनिंग के आदेश जारी होने के बावजूद इन डॉक्टरों को संबंधित अस्पतालों में री-ज्वाइनिंग नहीं मिली।
जिन अस्पतालों से यह डॉक्टर रिलीव हुए थे, वहां के एसएमओ उन्हें लिखित में री-ज्वाइनिंग के आर्डर लाने को कहने लगे। अप्रैल में अपने-अपने अस्पतालों से रिलीव हुए इन डॉक्टर्स को री-ज्वाइनिंग के साथ वेतन की भी चिंता सताने लगी थी। लेकिन अब आर्डर रिवॉक होने पर इन डाक्टरों ने रात की सांस ली है।
66-34 के अनुपात में भरी जाएंगी पीजी की सीटें
डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में हर साल 120 सीटें स्नातकोत्तर के लिए भरी जाती हैं। इनमें से 66 फीसदी सीटें इन-सर्विस जनरल ड्यूटी ऑफिसर और 34 फीसदी सीटें डायरेक्ट कोटे से भरी जाती हैं।
12 अप्रैल को पहले चरण की काउंसलिंग हुई थी। चयनित डॉक्टरों को 3 मई को ज्वाइनिंग के निर्देश दिए गए थे। लेकिन बाद में उन्हें बिना ज्वाइनिंग लौटा दिया गया। विभाग ने काउंसलिंग रद्द करने के पीछे डायरेक्ट कोटे की सीटों में तकनीकी समस्या का तर्क दिया था।
'प्रदेश के दोनों मेडिकल कॉलेजों में 160 सीटें पीजी के लिए निर्धारित हैं। 12 अप्रैल को हुई जीडीओ की काउंसलिंग को तकनीकी कारणों से रद्द किया गया था। लेकिन अब यह आर्डर रिवॉक कर दिए गए हैं। जीडीओ की मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। 20 मई को दूसरे चरण की काउंसलिंग होगी।'-डा. एसएस कौशल, निदेशक, मेडिकल एजूकेशन हिमाचल प्रदेश।