प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर सभी जिला अस्पतालों के डॉक्टरों पर विभाग ने कार्रवाई अमल में लाई है। स्वास्थ्य निदेशक की ओर से की कार्रवाई में सभी चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं यह भी स्पष्ट किया है कि उक्त सभी चिकित्सक इस नोटिस का तुरंत जवाब दें। जिला शिमला के चिकित्सक एनपीए देने की मांग कर रहे है। इसके अलावा डायनेमिक कॅरिअर प्रोगेशन स्कीम, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व एमएस की शक्तियां वापस देने की मांग कर रहे हैं।
चिकित्सकों का यह भी कहना है कि उन्हें पदोन्नति समय पर नहीं दी जा रही है। अब तक इन मांगों के पूरा न होने के कारण चिकित्सक भड़के हुए हैं। यही वजह है कि विरोधस्वरूप सभी चिकित्सक 7 मार्च को सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। ऐसे में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाई थी। अब स्वास्थ्य निदेशक ने चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बता दें कि हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ के बैनर तले जिला शिमला के पौने तीन सौ और प्रदेश के 2600 चिकित्सक 55 दिनों से काले बिल्ले और 22 दिनों से पेन डाउन पर हैं।
सामूहिक अवकाश की पहली ही दी थी जानकारी
हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ ने कारण बताओ नोटिस जारी करने पर कड़ा एतराज जताया है। संघ का कहना है कि उन्होंने पहले ही सरकार को एक दिन के सामूहिक अवकाश पर जाने की सूचना दी थी। ऐसे में नोटिस जारी करना सही नही है। महासचिव डॉ. विकास ठाकुर, जिलाध्यक्ष डॉ. दीपक कैंथला, महासचिव डॉ. योगराज वर्मा ने बताया कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।