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धर्मशाला: स्वास्थ्य, साहसिक खेलों में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स करवाएगा सीयू

Fri, 25 Nov 2022 10:43 AM IST
अरविन्द ठाकुर रविंद्र सिंह भड़वाल, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला

सार

छह महीने के डिप्लोमा कोर्स में विद्यार्थी को 20 क्रेडिट मिलेंगे। वहीं, एक साल के पीजी डिप्लोमा कोर्स के 40 क्रेडिट होंगे। 
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हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ट्रैवल, टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी में मौजूदा अकादमिक सत्र से दो नए पीजी डिप्लोमा और दो सर्टिफिकेट कोर्स शुरू हो रहे हैं। सेंटर फॉर प्रोमोशन ऑफ इकोलॉजी, एडवेंचर टूरिज्म, हेल्थ एंड कल्चर में ये कोर्स करवाए जाएंगे। ये डिप्लोमा कोर्स इकोलॉजी, स्वास्थ्य, धरोहर और साहसिक खेलों में होंगे। 

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केंद्रीय विश्वविद्यालय ने इन कोर्सेज के लिए पाठ्यक्रम भी तैयार कर लिया है। पाठ्यक्रम की एक यूनिट विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश में पर्यटन विकास की चुनौतियों और संभावनाओं पर आधारित रहेगी। पिछले कुछ समय में जिस तरह से पैराग्लाइडिंग जैसे साहसिक खेलों में हादसों में कई पर्यटकों की जान गई या घायल हुए हैं, उस लिहाज से इसमें साहसिक खेलों में सुरक्षा को लेकर विशेष फोकस रहेगा। इसमें पर्यटन क्षेत्र को और अधिक पेशेवर रूप देने के लिए पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएंगी। 

परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुमन शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी के दौर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने में पर्यटन क्षेत्र ने अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में मानव जीवन में अहम पहलुओं पर्यटन, धरोहर और स्वास्थ्य को एक साथ साधने के लिए यह नए कोर्स विश्वविद्यालय की ओर से शुरू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि स्नातक तक की पढ़ाई करने वाला कोई भी युवा इन कोर्सेज के लिए दाखिला ले सकता है। दाखिला प्रक्रिया इसी हफ्ते से शुरू होने जा रही है।
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डॉ. सुमन शर्मा ने बताया कि छह महीने के डिप्लोमा कोर्स में विद्यार्थी को 20 क्रेडिट मिलेंगे। वहीं, एक साल के पीजी डिप्लोमा कोर्स के 40 क्रेडिट होंगे। ऐसे में जो विद्यार्थी एक साल का पीजी डिप्लोमा कोर्स पूरा कर लेगा, उसे विभाग में पर्यटन संकाय में एमबीए की डिग्री के लिए लेट्रल एंट्री मिलेगी। उन्होंने बताया कि अगर कोई विद्यार्थी पीजी डिप्लोमा कोर्स छह महीने के बाद बीच में ही छोड़ देता है, तो उसे भी सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

60 फीसदी थ्योरी और 40 फीसदी होगा प्रैक्टिकल
नए कोर्सों में विश्वविद्यालय की ओर से नई शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। कोर्सों में 60 फीसदी थ्योरी और 40 फीसदी प्रैक्टिकल का हिस्सा होगा। 

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