दस साल तक किया कोटखाई की पंचायत का नेतृत्व
हिमाचल रत्न पुरस्कार से भी किया गया था सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जीवनभर सामाजिक सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी और मरने से पहले अपना शरीर भी दान कर गए। यहां बात हो रही है कोटखाई के 97 साल तक जीवित रहे समाजसेवी मंगत राम की।
कोटखाई के मंगत राम चौहान 97 का उनके पैतृक गांव डोमेहर कोटखाई में सोमवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। इसके बाद उनका शरीर इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला को दान कर दिया। उन्होंने क्यारी पंचायत के लिए आय के कई स्थायी स्रोत पैदा किए। उन्होंने 10 वर्षों तक पंचायत का नेतृत्व भी किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने गरीबों को भारी मात्रा में जमीन आवंटित की और पंचायत के लिए लगभग 60 बीघा में एक बगीचा भी लगाया जिससे सालाना लगभग 30 लाख रुपये की आय होती है। इनके कार्यकाल में पंचायत ने एशिया में सर्वश्रेष्ठ पंचायत का पुरस्कार भी जीता। 50 साल की आयु में उन्होंने अपनी लगभग सारी संपत्ति अपने बच्चों को दे दी। एक एजुकेशन ट्रस्ट शुरू किया जो पूर्णतः परिवार द्वारा तथा दानदाताओं द्वारा वित्तपोषित था।
उन्होंने अनाथ बच्चों के लिए एक आदर्श विद्यालय। 50 से ज्यादा बच्चों को कॉलेज स्तर तक आवासीय सुविधाएं और प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग प्रदान की। गिरि ज्ञान विद्या ज्योति ट्रस्ट कोटखाई में शिक्षा प्राप्त कई बच्चे सरकारी और पेशेवर नौकरियों में हैं। यह ट्रस्ट पूरी तरह से परिवार द्वारा वित्त पोषित और दानदाताओं द्वारा संचालित था। राज्य सरकार ने उन्हें हिमाचल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया था और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने उन्हें उनके सामाजिक कार्यों के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया था।
परिवार को बोले था, कोई अनुष्ठान न करें
मृत्यु से पहले मंगतराम ने वर्ष 2014 में अपना शरीर इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया था, परिवार को निर्देश दिया था कि उनकी मृत्यु के बाद कोई भी अनुष्ठान न किया जाए। 10 नवंबर को उनका पार्थिव शरीर अस्पताल को इस संदेश के साथ सौंप दिया कि शरीर का हर अंग मानव जीवन और विज्ञान की बेहतरी के लिए होना चाहिए। जीवन भर का एक ही संदेश रहा कि गरीबों की मदद करें और दूसरों के प्रति दयालु रहें। आईजीएमसी की देह दान समिति को यह देह दान किया गया।