मार्कंडेय मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर में विवादित शब्द शूद्र लिखने के मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है। पुलिस ने महंत केवल पूरी, उनके दो अनुयायियों मनोज कुमार और हरदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया। महंत अनुयायियों को भड़काने और दोनों अनुयायियों के खिलाफ पुलिस ड्यूटी में बाधा पहुंचाने और सरकारी कर्मचारियों से हाथापाई करने के आरोपों पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
रविवार को पुलिस ने तीनों आरोपियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया। सीजेएम ने तीनों को 17 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इस दौरान तीनों आरोपियों की जमानत याचिका भी कोर्ट ने खारिज कर दी। शिव मंदिर की दीवार पर विवादित शब्द लिखने को लेकर शनिवार शाम खूब हंगामा हुआ था।
पुलिस कर्मी के साथ की हाथापाई
पुलिस के मुताबिक दीवार के समीप ही धूनी लगाकर बैठे बाबा को दीवार पर लिखे विवादित शब्द मिटाने बारे समझाया ही जा रहा था। इस दौरान कुछ लोग वहां आए और एक पुलिस कर्मी के साथ हाथापाई की। लिहाजा, पुलिस ने दोनों पर ड्यूटि में बाधा पहुंचाने, सरकारी कर्मी के साथ हाथापाई करने का मामला दर्ज किया है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र में लिखे विवादित शब्दों को मिटा दिया था। लेकिन, बाद में पुन: वहीं विवादित शब्द लिखे गए। शनिवार को इन शब्दों को मिटाने के लिए पुलिस मौके पर गई थी। लेकिन वहां मौजूद अनुयायियों के साथ नोंक झोंक हो गई थी।
दो अन्य अभी भी फरार
पुलिस ने भादंसं की धारा 353, 332 और 506 के तहत महंत केबलपूरी के दो अनुयायियों मनोज कुमार और हरदीप सिंह को गिरफ्तार किया। जबकि महंत केवलपूरी पर भी इसके लिए भड़काने के आरोप में भादंसं की धारा 109 के तहत मामला दर्ज किया है। हालांकि, पीसीआर एक्ट की धारा तीन और सात के तहत बाबा पर पहले ही मुकद्दमा दर्ज किया गया था।
डीएसपी हेडक्वार्टर प्रताप सिंह ठाकुर ने बताया कि तीनों आरोपियों को शनिवार शाम जैसे ही समझाने का प्रयास किया जा रहा था तो कुछ लोगों ने पुलिस कर्मियों के साथ हाथापाई की। इस मामले में दो व्यक्ति अभी भी फरार है। उनकी पहचान की गई है। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।
पक्ष रखने को हाईकोर्ट में देंगे अर्जी: हांडा
महंत केवल पूरी के अधिवक्ता राजेंद्र हांडा ने सुनवाई के बाद बताया कि मामले में पुलिस ने जो आरोप लगाए हैं वह निराधार है। मौके पर न तो किसी के साथ हाथापाई हुई और न ही भड़काया गया है। वह सीजीएम के फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती देंगे। उनके अनुसार जहां तक हाईकोर्ट के आदेशों की बात है तो इसमें शिव मंदिर प्रबंधन पार्टी नहीं है। मंदिर सन्यासियों का है। बाबा केवल पूरी लोगों का निशुल्क इलाज करते हैं।
शूद्र का अभिप्राय किसी जाति विशेष से नहीं बल्कि अशुद्ध व्यक्ति को शूद्र से जोड़ा गया है। कानून में भी शूद्र को जाति नहीं माना गया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में भी अपना पक्ष रखने के लिए प्रार्थना करने पर विचार किया जा रहा है। मंदिर में आने से किसी को नहीं रोका जाता।