प्रदेश हाईकोर्ट ने उपायुक्त शिमला और तहसीलदार (वसूली) को प्रापर्टी टैक्स मामले में प्रतिवादी बनाया है। नगर निगम की ओर से प्रापर्टी टैक्स वसूलने में बरती जा रही कोताही को गंभीरता से लेकर दोनों प्रतिवादियों से एक सप्ताह में जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश बीके शर्मा की खंडपीठ ने उक्त अधिकारियों से जानकारी तलब की है कि प्रापर्टी टैक्स वसूली के जो मामले तहसीलदार (वसूली) को नगर निगम ने भेजे हैं। उनमें अभी तक क्या कार्रवाई हुई और उनका निपटारा कब तक होगा?
अदालत ने प्रदेश सरकार, शहरी विकास विभाग और नगर निगम शिमला की ओर से यूनिट एरिया मेथड से टैक्स वसूले जाने के प्रस्ताव पर की गई कार्यवाही की रिपोर्ट भी तलब की है। निगम की ओर से अदालत को बताया गया है कि प्रापर्टी टैक्स वसूली के लिए प्रस्ताव मंजूरी के लिए सरकार के पास लंबित है।
यह प्रस्ताव नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेशों पर तैयार किया है। अदालत में बताया गया है कि प्रापर्टी टैक्स डिफाल्टरों से वसूली के मामले तहसीलदार (वसूली) को भेजे गए हैं। अदालत ने टैक्स वसूली की जानकारी दस जुलाई तक प्रतिवादियों से तलब की है।
216 भवन मालिक हैं डिफाल्टर
राजधानी में लंबे अरसे से 216 भवन मालिकों ने प्रापर्टी टैक्स जमा नहीं करवाया है। डिफाल्टरों के राजस्व रिकार्ड की रेड एंट्री करने के लिए नगर निगम ने मामला राजस्व विभाग को भेजा है। इन 216 डिफाल्टरों से नगर निगम ने करीब 56 लाख रुपये का प्रापर्टी टैक्स वसूलना है।
1997 से नहीं हो रही टैक्स की वसूली
साल 1997 से नगर निगम को यह भवन मालिक प्रापर्टी टैक्स की अदायगी नहीं कर रहे हैं। निगम प्रशासन का कहना है नोटिस जारी करने के बावजूद कुछ लोग ढुलमुल का रवैया अपना रहे हैं। जबकि कुछ लोगों ने नोटिस के बाद गृहकर चुकता भी कर दिया है।