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हंसराज रघुवंशी के मेरा भोला है भंडारी... ने तोड़े कई रिकॉर्ड, अब तक 7.6 करोड़ व्यूज

Thu, 01 Aug 2019 05:22 PM IST
अरविन्द ठाकुर फरेंद्र ठाकुर, अमर उजाला, मंडी
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- फोटो : अमर उजाला
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बाबा के नाम से मशहूर जटाओं वाले लोकगायक हंसराज रघुवंशी और मशहूर लोकगायक सुरेश वर्मा की जुगलबंदी से बनाए गए लोकभजन या लोकगीत ‘मेरा भोला है भंडारी, करते नंदी की सवारी’ ने सोशल मीडिया पर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यू-ट्यूब पर इस लोकगीत को 7.6 करोड़ दर्शक देख चुके हैं। इसे हिमाचल ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया के कोने-कोने में देखा जा रहा है। इस वीडियो को मुंबई से प्रशिक्षण प्राप्त मशहूर निर्देशक सुरेश सुर ने तैयार किया है।   

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23 फरवरी 2019 को यू-ट्यूब पर अपलोड किए इस वीडियो के अब तक लगभग 76 मिलियन यानी 7.6 करोड़ व्यूज हो चुके हैं। विशेष बात यह है कि यू-ट्यूब पर इस वीडियो को अपलोड किए महज दो महीने का वक्त भी नहीं हुआ है। इस प्रतिभा को देखकर बॉलीवुड में भी बाबा को गाने का मौका मिला है। हंसराज रघुवंशी को बॉलीवुड की प्लेबैक सिंगिंग में भी मौका मिल गया है। बाबा का एक गीत रिकॉर्ड हो चुका है। संभावना जताई जा रही है कि एक नामी बैनर के तले बनी फिल्म का गीत जुलाई के मध्य रिलीज होगा।

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बचपन से था गाने का शौक

हंसराज के अनुसार उन्हें बचपन से ही गिटार बजाने और गाना गाने का शौक था। उन्हें दिन में जब भी समय मिलता, वह अकेले में गुनगुनाते रहते थे। मंडी जिले के सुंदरनगर में कॉलेज कैंटीन में टेबल की थाप पर स्वर लहरियां छेड़ने वाले हंसराज को क्या पता था कि एक दिन यही शौक उन्हें इतनी मशहूर कर देगा। 

मेरी जटाएं महादेव की देन 
हंसराज रघुवंशी के बालों ने जटाओं का रूप लिया है। अपनी इन जटाओं के बारे में वह कहते हैं कि यह महादेव की देन हैं। उनका गायन भी महादेव को ही समर्पित है। वही उनसे गवाते हैं। 

अर्की के रहने वाले हैं रघुवंशी
हंसराज रघुवंशी मूल रूप से सोलन-बिलासपुर की सीमा पर अर्की तहसील के मांगल गांव के रहने वाले हैं। उनका जन्म बिलासपुर में ही हुआ है। उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई मंडी जिले के एमएलएसएम सुंदरनगर से की है।

अब तक गा चुके ये गीत:
उन्होंने अब तक ‘मेरा भोला है भंडारी करता नंदी की सवारी’, ‘चिट्टा तेरा चोला काला डोरो ओ शभुंआ आ हाथ सोठी हो’, ‘गंगा किनारे चले जाना’, ‘जोगी बेखिए रूप कमाल वे तु गुदड़ी दे विच लाल’, ‘भवन बड़ा वे ऊंची धार माईए सोहणा नजारा तेरा मंदिरा दा’, ‘बम-बम भोले डम डमा डम डोले’, ‘छोटी सी नन्हीं सी कली हूं रे बाबुल’, ‘चलो कसोल’, ‘शिमले रिए शोरिए’, ‘साईं तरी चौखट पे बन जाए बिगड़े काम’ सहित अन्य गीत गा चुके हैं।

उन्होंने अपने इन गीतों को दर्शकों के सामने कुछ ऐसे तरीके से पेश किया है कि आज उनके गीतों और देवभूमि को देश के कोने-कोने तक पहचान मिल रही है। इनके गीतों को युवाओं की ओर से खूब सराहा जा रहा है।

देखें गाना
 
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