हंसराज के अनुसार उन्हें बचपन से ही गिटार बजाने और गाना गाने का शौक था। उन्हें दिन में जब भी समय मिलता, वह अकेले में गुनगुनाते रहते थे। मंडी जिले के सुंदरनगर में कॉलेज कैंटीन में टेबल की थाप पर स्वर लहरियां छेड़ने वाले हंसराज को क्या पता था कि एक दिन यही शौक उन्हें इतनी मशहूर कर देगा।
मेरी जटाएं महादेव की देन
हंसराज रघुवंशी के बालों ने जटाओं का रूप लिया है। अपनी इन जटाओं के बारे में वह कहते हैं कि यह महादेव की देन हैं। उनका गायन भी महादेव को ही समर्पित है। वही उनसे गवाते हैं।
अर्की के रहने वाले हैं रघुवंशी
हंसराज रघुवंशी मूल रूप से सोलन-बिलासपुर की सीमा पर अर्की तहसील के मांगल गांव के रहने वाले हैं। उनका जन्म बिलासपुर में ही हुआ है। उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई मंडी जिले के एमएलएसएम सुंदरनगर से की है।
अब तक गा चुके ये गीत:
उन्होंने अब तक ‘मेरा भोला है भंडारी करता नंदी की सवारी’, ‘चिट्टा तेरा चोला काला डोरो ओ शभुंआ आ हाथ सोठी हो’, ‘गंगा किनारे चले जाना’, ‘जोगी बेखिए रूप कमाल वे तु गुदड़ी दे विच लाल’, ‘भवन बड़ा वे ऊंची धार माईए सोहणा नजारा तेरा मंदिरा दा’, ‘बम-बम भोले डम डमा डम डोले’, ‘छोटी सी नन्हीं सी कली हूं रे बाबुल’, ‘चलो कसोल’, ‘शिमले रिए शोरिए’, ‘साईं तरी चौखट पे बन जाए बिगड़े काम’ सहित अन्य गीत गा चुके हैं।
उन्होंने अपने इन गीतों को दर्शकों के सामने कुछ ऐसे तरीके से पेश किया है कि आज उनके गीतों और देवभूमि को देश के कोने-कोने तक पहचान मिल रही है। इनके गीतों को युवाओं की ओर से खूब सराहा जा रहा है।
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