केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को एनआईटी हमीरपुर का दौरा किया। उन्होंने कहा कि अधिकार मांगने से नहीं मिलते, बल्कि जिम्मेवारी लेने से अधिकार खुद मिल जाते हैं। उन्होंने यह बात एनआईटी संस्थान में चल रही पेयजल किल्लत को लेकर कही।
जिला हमीरपुर में एनआईटी जैसा राष्ट्र स्तरीय संस्थान है, लेकिन यह बताया जाए कि हमीरपुर जिले के विकास में इस संस्थान का अब तक क्या योगदान रहा? शायद इसका जवाब संस्थान के पास भी नहीं है। यह बात केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को एनआईटी हमीरपुर के दौरे के दौरान कही। उन्होंने कहा कि अधिकार मांगने से नहीं मिलते, बल्कि जिम्मेवारी लेने से अधिकार खुद मिल जाते हैं। उन्होंने यह बात एनआईटी संस्थान में चल रही पेयजल किल्लत को लेकर कही।
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सख्त लहजे में कहा कि एनआईटी में देश के एक से बढ़कर एक शिक्षक हैं, लेकिन क्या कभी हमीरपुर जिले के स्कूली बच्चों या शिक्षकों के उत्थान के लिए कुछ प्रयास किए। एनआईटी के प्रोफेसर और अन्य विषय विशेषज्ञ चाहें तो जिले के सरकारी स्कूलों के गणित और विज्ञान विषयों के शिक्षकों के लिए क्षमता वर्धन शिविर लगाकर उनका ज्ञान बढ़ा सकते हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि संस्थान की पेयजल समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और उपायुक्त से कह दिया है। उन्होंने समाधान का आश्वासन भी दिया है, लेकिन एनआईटी खुद भी एक कदम आगे चलकर जिले के विकास में अपनी अहम भूमिका निभाए।
बता दें कि एनआईटी के अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री से कहा था कि संस्थान में प्रतिदिन छह लाख लीटर पानी की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर पानी मिल रहा है। इससे संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को दिक्कतें हो रही हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनआईटी खुद भी जिम्मेवारी ले तो अधिकार स्वयं मिल जाएंगे। बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे कलाम और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू भी हमीरपुर एनआईटी के दौरे के दौरान संस्थान को जिले के कुछ गांवों को गोद लेकर विकास कार्यों को गति देने की बात कर चुके हैं।