भारत-चीन एलएसी विवाद में हमीरपुर के भोरंज उपमंडल की कड़ोहता के शहीद अंकुश ठाकुर छुट्टी मंजूर होने के बावजूद घर नहीं आ सके। कोरोना के चलते लॉकडाउन के कारण ट्रेन, बस और एयर सुविधा बंद होने के कारण उन्हें छुट्टी रद्द करवानी पड़ी थी। अंकुश इन दिनों घर आने वाले थे। सेना में भर्ती होने के बाद अंकुश एक ही बार घर आए थे। उधर, शहीद की पार्थिव देह का बुधवार को परिवार इंतजार करता रहा।
बेटे के इंतजार में मां ऊषा देवी की आंखों पथरा गई हैं। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला 13 वर्षीय भाई आदित्य भी अपने भाई की मौत के गम में आंसू बहा रहा है। बुधवार सुबह साढ़े सात बजे जैसे ही फोन पर सेना मुख्यालय से बेटे की शहादत की सूचना मिली, पूरे परिवार में चीखपुकार मच गई। परिवार के अधिकांश सदस्य अभी बिस्तर से उठे ही थे कि बेटे की मौत की खबर मिल गई।
मां दिन भर रोती हुई बेटे की पार्थिव देह के इंतजार में दरवाजे की तरफ टकटकी लगाए रही। अन्य महिलाएं भी आंसू नहीं रोक पाईं। आसपड़ोस के बड़े-बुजुर्ग शहीद के माता-पिता को ढांढस बंधाते दिखे। भारत-चीन एलएसी विवाद में भोरंज के कड़होता के 21 वर्षीय जवान अंकुश ने शहादत पाई है। अंकुश वर्ष 2018-19 में भारतीय सेना की 3 पंजाब रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। अंकुश ने सात माह पूर्व घर पर रंगरूटी काट कर सियाचिन में ड्यूटी ज्वाइन की थी।
पिता बोले - बेटे की शहादत पर गर्व, चीन को देना होगा मुंहतोड़ जवाब
शहीद के पिता सेवानिवृत्त हवलदार अनिल कुमार ने कहा कि उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी देशसेवा के लिए गई थी। बेटे की शहादत पर गर्व है। वास्तविक नियंत्रण रेखा में नापाक हरकतें करने वाले चीन को उसी की भाषा में मुंहतोड़ जवाब देना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि पिता स्वर्गीय सीताराम भी सेना से ऑनरेरी कैप्टन रिटायर आए थे।
शहीद के चाचा सुनील कुमार, ताया ओंकार सिंह, पूर्व पंचायत प्रधान वीर सिंह राणौत, वार्ड पंच विनोद कुमार सोनी और शम्मी कुमार ने केंद्र सरकार से चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की है। कहा कि अगर देश को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाना है तो चीन के उत्पादों को बहिष्कार करना होगा। वीरवार को शहीद की पार्थिव देह पैतृक गांव में पहुंचेगी, जहां सैनिक का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।