राजेश ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि लुधियाना से सामान खरीदकर इसे महज एक हफ्ते के भीतर तैयार किया है। इसके बाद बाकायदा इसका सफल ट्रायल भी किया। डेढ़ एचपी के पावर टिलर में तीन हल, जबकि पांच एचपी के पॉवर टिलर में पांच छोटे हल लगाए गए हैं। रबड़ टायरों की बजाय इसमें लोहे की रिम के साधारण टायर लगाए गए हैं, जिससे हल खींचते समय टायर स्किड न हों और आसानी से खेतों में चल सके।
दस टिलरों का मिल गया ऑर्डर
जब उन्होंने खेतों में ट्रायल किया तो करीब दस पॉवर टिलरों का ऑर्डर उन्हें मिल गया। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर बाजार में लांच करने के लिए पैसों की आवश्यकता है। डेढ़ एचपी के पॉवर टिलर में केरोसिन और पेट्रोल दोनों प्रयोग होंगे। जबकि पांच एचपी के डेढ़ एचपी के पॉवर टिलर में केवल डीजल प्रयोग होगा।