संस्थागत प्रसव के मामले मे प्रदेश में हमीरपुर जिला अव्वल है। दूसरी ओर चंबा जिले में पिछले तीन वर्षों में गर्भवतियों के संस्थागत प्रसव की दर प्रदेशभर में सबसे कम रही है। घरेलू प्रसव में चंबा प्रदेश में शीर्ष स्थान पर है। संस्थागत प्रसव की तुलना में घरेलू प्रसव अधिक जोखिम भरा होता है। इस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। प्रदेश के अन्य जिलों में संस्थागत प्रसव की दर 90 प्रतिशत से ऊपर है, जबकि चंबा में यह दर 72 प्रतिशत के करीब है। स्वास्थ्य विभाग की 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, चंबा जिला संस्थागत प्रसव करवाने में सबसे पिछड़ा हुआ है। हमीरपुर जिला लगातार दूसरे वर्ष भी पहले स्थान पर है, जहां संस्थागत प्रसव की दर 99.98 प्रतिशत है जो पिछले वर्ष 98.92 प्रतिशत थी।
इस वर्ष चंबा जिला में संस्थागत प्रसव की दर 72 प्रतिशत रही, जबकि अन्य जिलों में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत के पार है। कांगड़ा में संस्थागत प्रसव की दर 99.15, बिलासपुर में 99.12, शिमला में 98.76, उना में 98.53, सोलन में 98.13, मंडी में 95.80, कुल्लू में 95.76, सिरमौर में 91.90, किन्नौर में 88.62, और लाहौल स्पीति में 83.72 प्रतिशत थी। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में कुल 239 घरेलू प्रसव हुए। इनमें से 194 घरेलू प्रसव अकेले चंबा जिले से हुए। चंबा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिपन ठाकुर चंबा जिले में प्रसव करवाने के लिए डिलीवरी प्वाइंट्स की संख्या कम है। इसके कारण संस्थागत प्रसव की दर थोड़ी कम है। विभाग डिलीवरी प्वाइंट्स की संख्या बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है।