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10 मिनट की ओलावृष्टि से सेब की फसल को करोड़ों का नुकसान

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जिले के सेब उत्पादक क्षेत्रों में ओलावृष्टि से फसल बुरी तरह प्रभावित
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में दोपहर बाद करीब 10 मिनट की ओलावृष्टि से सेब की फसल को करोड़ों का नुकसान हुआ है। ठियोग के अलावा कोटखाई, नारकंडा, खड़ापत्थर और चौपाल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ओलावृष्टि से सेब की फसल प्रभावित हुई है। कहीं ओलों तो कहीं आंधी-तूफान से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है। ओलावृष्टि से सेब पेड़ों से झड़ कर बगीचों में जमीन पर बिछ गए। मौसम के रुख में आए बदलाव के बाद तापमान में गिरावट से भी सेब की फसल को भारी नुकसान होने का अंदेशा जताया जा रहा है।
ठियोग की 5 पंचायतों में ओलावृष्टि के कारण सबसे अधिक नुकसान हुआ है। केलवी पंचायत के गढ़ाकुफरी के बागवान विजय वर्मा ने बताया कि सिर्फ 10 मिनट की ओलावृष्टि से सेब की पूरी फसल तबाह हो गई। ओलों का आकार इतना बड़ा था कि पौधों की छाल तक उखड़ गई। धारकंदुरु पंचायत के विद्या प्रकाश ने बताया कि ओलावृष्टि से पहले तूफान से एंटी हेलनेट उड़ गए और बांस टूट गए। भाज, भराणा और कथोग पंचायत में भी सेब की फसल को ओलावृष्टि के कारण भारी नुकसान हुआ है। यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष ठाकुर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि ओलावृष्टि के कारण भगवानों को भारी नुकसान हुआ है कई क्षेत्रों में सेब के पौधे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। किसानसभा के जिला अध्यक्ष सत्यवान पुंडीर ने प्रदेश सरकार से किसान बागवानों को ओलावृष्टि के कारण हुए नुकसान का तुरंत आंकलन कर मुआवजा उपलब्ध करवाने की मांग की है।
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मटर, गोभी, फ्रासबीन को भी भारी नुकसान
ओलावृष्टि के कारण सेब के अलावा शिमला जिले में गोभी, फ्रासबीन और मटर की फसल भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। ठियोग के अलावा कोटखाई और चौपाल में इन दिनों मटर का तुड़ान चल रहा है, जबकि गोभी और फ्रासबीन की फसल भी तैयार है। ओलों के कारण फसल खराब होने से सब्जी उत्पादकों को भी भारी नुकसान हुआ है।
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