बोले, प्रदेश में इन दोनों से होता है फसलों को नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। ओलावृष्टि और पाले को प्रमुख जोखिम का दर्जा दिया जाना चाहिए। हिमाचल में इन दोनों से ही फसलों को नुकसान होता है। यह सुझाव प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बंगलुरू में दो दिवसीय नेशनल रिव्यू कार्यशाला में दिया गया। इसमें देशभर से आए वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विभिन्न बीमा कंपनियों के उच्च अधिकारी और हिमाचल बागवानी विभाग के निदेशक विनय सिंह ने भाग लिया।
सम्मेलन के दौरान विनय सिंह ने हिमाचल में क्रियान्वित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को अधिक किसान-हितैषी बनाने के लिए सुझाव दिए। विनय सिंह ने बताया कि ओलावृष्टि, पाला और बादल फटने की घटनाएं पर्वतीय क्षेत्रों में ज्यादा होती हैं। इन जोखिमों के सटीक आकलन के लिए सूक्ष्म-स्तरीय मौसम सूचकांक और सघन स्वचालित मौसम केंद्र नेटवर्क की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि को केवल एड-ऑन जोखिम के रूप में न मानकर मुख्य जोखिम के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए और पाला से होने वाले नुकसान को भी बीमा में प्रमुख घटक बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 15 वर्षों से बदलते मौसम के कारण सेब उत्पादक क्षेत्रों में पर्याप्त बर्फबारी नहीं हो पा रही है, जिससे शीत ऋतु में आवश्यक ठंड (चिलिंग आवर) कम हो रही है। सेब की रॉयल किस्म को अच्छे फूल एवं फल के लिए 7 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर 1200 से 1600 घंटे की आवश्यकता होती है। चिलिंग ऑवर्स की कमी से उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में बीमा पे-आउट को वर्तमान 265 रुपये से बढ़ाया जाना आवश्यक है। इस वर्ष हिमाचल में लगभग 62 हजार बागवानों ने इस योजना के तहत फसल बीमा कराया है। हालांकि ओलावृष्टि के लिए उपलब्ध एड-ऑन विकल्प पर अपेक्षित सहभागिता नहीं मिल पाई जबकि बागवान से मात्र 23 रुपये प्रति पेड़ प्रीमियम लेकर नुकसान की स्थिति में 450 रुपये प्रति पेड़ तक क्षतिपूर्ति का प्रावधान है।
14 से 29 फरवरी तक करवाएं बीमा
आड़ू, प्लम, अनार और संतरा की फसलों का बीमा कराने की अवधि 14 फरवरी से 29 फरवरी तक निर्धारित की है। बागवानी विभाग के निदेशक विनय सिंह ने प्रदेश के सभी बागवानों से अपील की है कि सभी पात्र बागवान समय रहते फसल बीमा योजना के तहत अपना बीमा करवाकर संभावित प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से स्वयं को सुरक्षित करें।