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भयावह तस्वीर: हिमाचल में नशे की ओवरडोज से तीन साल में 66 मौतें, अदालतों में 5,437 मामले लंबित

Tue, 24 Mar 2026 07:18 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

मंगलवार को भाजपा विधायक जीतराम कटवाल और प्रकाश राणा के सवाल पर दिए गए लिखित जवाब में सरकार की ओर से पेश आंकड़ों ने स्थिति की भयावह तस्वीर पेश की है।
 
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नशा, चिट्टा। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में नशे का बढ़ता जाल अब गंभीर सामाजिक और कानून व्यवस्था की चुनौती बन चुका है। विधानसभा में मंगलवार को भाजपा विधायक जीतराम कटवाल और प्रकाश राणा के सवाल पर दिए गए लिखित जवाब में सरकार की ओर से पेश आंकड़ों ने स्थिति की भयावह तस्वीर पेश की है। सरकार के लिखित जवाब के अनुसार वर्ष 2023 से 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश में नशे की ओवरडोज के कारण 66 लोगों की मौत हुई है। वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 में 8, 2024 में 31 और 2025 में 27 मौतें दर्ज की गईं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वर्ष 2024 में ओवरडोज से मौतों में अचानक तेज वृद्धि हुई, जो नशे की समस्या के तेजी से फैलने की ओर संकेत करती है।

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हालांकि, जवाब में यह भी उल्लेख किया गया कि 1 जनवरी 2020 से 31 जनवरी 2026 तक ओवरडोज से मौत का कोई मामला सरकार के संज्ञान में नहीं आया है। प्रदेश में नशे से संबंधित कुल 6,246 मामले दर्ज किए गए हैं, जो इस समस्या की व्यापकता को दर्शाते हैं। पुलिस द्वारा 5,684 मामलों में चालान न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इसके अलावा 19 मामलों में रद्द रिपोर्ट दाखिल की गई, 57 मामले अब तक अनट्रेस्ड हैं और 486 मामले अभी भी जांच के अधीन हैं। सबसे चिंताजनक पहलू न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति और कम सजा दर है। अदालतों में विचाराधीन मामलों में से अब तक केवल 108 मामलों में ही सजा हो पाई है, जबकि 139 मामलों में आरोपित बरी हो गए। इसके विपरीत, 5,437 मामले अभी भी न्यायालयों में लंबित हैं।
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