गुरु नानक देव जी के वंशजों की बसाई ऊना नगरी में पहुंचने पर गुरु नानक देव जी के वंशज बाबा सरबजोत सिंह जी बेदी, बाबा अमरजोत सिंह बेदी व इलाका निवासी समूह संगत द्वारा नगर कीर्तन का पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया।
किला बाबा साहिब सिंह जी बेदी में नगर कीर्तन पहुंचने पर गुरु वंशजों की तरफ से परंपरागत रूप से स्वागत किया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को रूमाला भेंट करने क अलावा पांच प्यारों, निशानची को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर बाबा बाल जी, बाबा प्रीतपाल सिंह, बाबा सुरिंदर सिंह, गुरु नानक मिशन संस्था के महासचिव हरपाल सिंह कोटला, बलविंदर सिंह, जोगमान सिंह, परमजीत सिंह, सुखविंदर सिंह, अंग्रेज सिंह, इकबाल सिंह, सतनाम सिंह सहित हजारों की संख्या में संगत मौजूद थी।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भारत और पाकिस्तान में उपजे तनाव का अंतरराष्ट्रीय नगर कीर्तन पर कोई असर नहीं पड़ा है। राजनयिकों को हटाने और व्यापार बंद करने के फैसले दो देशों की सरकारों में संबंधों का मामला है। गुरु नानक देव जी पूरे समाज के गुरु हैं। अंतरराष्ट्रीय नगर कीर्तन में हर वर्ग से लोग शामिल हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय नगर कीर्तन की हिमाचल प्रदेश में अगुवाई कर रहे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी एवं हिमाचल से प्रतिनिधित्व कर रहे दिलजीत सिंह भिंडर ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि परम पवित्र धरती ननकाना साहिब (पाकिस्तान) से शुरू हुआ नगर कीर्तन अपनी भव्यता के साथ आगे बढ़ा है। गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित इस नगर कीर्तन पर किसी भी रूप से दो देशों के तनाव का कोई असर नहीं पड़ा है। गुरु नानक देव जी का जब जन्म हुआ था तब केवल सनातन एवं मुस्लिम धर्म ही अस्तित्व में थे। सभी धर्मों के लोगों ने बाबा नानक को अपने गुरु की तरह ही माना। उन्होंने कहा ‘जिन प्रेम कियो तिन ही प्रभु पाया।’ बाबा नानक से प्रेम करने वाला चाहे किसी भी धर्म का क्यों न हो, उसने बाबा नानक के दर से कुछ न कुछ जरूर हासिल किया।
भिंडर ने कहा कि सभी धर्मों के लोगों ने बाबा नानक की उपासना की। नगर कीर्तन पर धारा 370 व 35-ए जम्मू कश्मीर से हटाए जाने का आगे भी कोई असर नहीं होगा। नगर कीर्तन में ननकाना साहिब से शामिल हुए कार सेवा का काम देख रहे बाबा अमर सिंह ने कहा कि नगर कीर्तन पर धारा 370 व 35-ए का किसी भी तरह से कोई असर नहीं है। पाकिस्तान सरकार की ओर से अनुमति मिलने के बाद ही नगर कीर्तन शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी भारत एवं पाकिस्तान की सरकारें धार्मिक कार्यक्रमों के लिए नियमों में छूट देने में संकोच नहीं करेंगी।